Sant Ravidas जी कहानियां वो 10 बातें जिसने रघु को मिट्टी से उठाकर सिंहासन तक पहुंचा दिया
“वो 10 बातें जिसने रघु को मिट्टी से उठाकर सिंहासन तक पहुंचा दिया” Sant Ravidas Ji ki kahaniya

ये कहानी है, Sant Ravidas की नगरी वाराणसी शहर, वाराणसी शहर में एक छोटा सा लड़का था — जिसका नाम रघु था रघु,गरीबी में पला, बड़ा, लेकिन उसके सपने आसमान जैसे ऊंचे थे। घर में पैसे कम, अवसर कम… लेकिन मन में उम्मीद ,कुछ बड़ा करने की चाहत थी।
एक दिन बहुत थककर, टूटी फूटी चप्पलों में, गलियों से घूम रहा था। मन में एक ही सवाल— “क्या मैं भी कभी सफल, अमीर और सम्मानित बन पाऊंगा?” यही सोचते हुए वह Sant Ravidas जी के पुराने मंदिर के पास पहुंचा। अंदर दिये जल रहे थे, और शांति का वातावरण था।
वहां पर उसे एक व्यक्ति मिले जिसका नाम राहुल था,रघु ने उसकी सारी परेशानी बताई,राहुल ने कहा मैं sant Ravidas जी की 10 बाते बताता हु, अगर तुमने ये बाते मान ली तो तुम्हारा जीवन सफल हो जाएगा । रघु वही बैठ गया… और ऐसा लगा जैसे Sant Ravidas जी स्वयं खुद रघु को ये बाते बता रहे हो । राहुल ने Sant Ravidas जी की 10 बातें बताई ,जिसने रघु का जीवन बदल दिया।
कैसे रघु का जीवन Sant Ravidas Ji ki kahaniya से बदला इन 10 बातों से और कैसे कैसे रघु ने उन बातों पर अमल किया ,और सम्मानित और सफल व्यक्ति बन पाया। उन्हीं 10 बातों के बारे हम आज जानेंगे Sant Ravidas Ji ki kahaniya –
पहला “मन चंगा तो कठौती में गंगा” → यानी सब अमीरी मन से शुरू होती है रघु ने समझा — जब मन साफ, शांत और आत्मविश्वासी हो… तो छोटा काम भी बड़ा बन जाता है। उसी दिन उसने निश्चय किया — पहले मन को मजबूत बनाऊंगा, फिर दुनिया जीतूंगा।
दूसरा “कर्म करो, फल की चिंता छोड़ दो” → यानी लगातार मेहनत सबसे बड़ा धन है उसने दुकान में काम करते हुए शिकायत बंद कर दी। हर दिन नया कौशल सीखने लगा। धीरे-धीरे उसके हाथ का काम सुंदर होता गया। लोग कहने लगे — “ये लड़का मेहनत से सोना बना देता है।”
तीसरा “सच्चाई सबसे बड़ी पूंजी है” → यानी ईमानदारी अमीर बनाती है दुकान की गल्ले में एक दिन ज्यादा पैसे आए। रघु ने तुरंत मालिक को बताया। मालिक ने कहा— “तू एक दिन बड़ा आदमी बनेगा।” क्योंकि ईमानदारी वो पूंजी है जो बैंक में नहीं, दिलों में जमा होती है।
चौथा “जैसी संगत वैसी रंगत” → यानी सही लोगों के साथ जुड़ो उसने नकारात्मक दोस्तों से दूरी बनाई। अपने से बेहतर लोगों, दुकानदारों, कारीगरों, व्यापारियों के बीच रहने लगा। उसकी सोच और नजरिया बदलने लगा। उच्च संगत ने उसे उच्च लक्ष्य दिए।
पांचवां “छोटे काम को भी कम मत समझो” → यानी हर काम की इज्जत करो रघु पहले छोटे काम को शर्म समझता था। लेकिन संत रविदास जी ने उसे सिखाया— “काम छोटा नहीं, सोच छोटी होती है।” उसने तन-मन से काम करना शुरू किया… और जल्द ही उसी छोटे काम से उसकी पहचान बनी।
छठवां “अपना कर्तव्य सबसे बड़ा धर्म है” → यानी काम में निष्ठा ही तरक्की है रघु ने काम को पूजा की तरह किया। काम में सत्य, नियम, समय — सबका पालन करने लगा। धीरे-धीरे मालिक ने दुकान उसे संभालने को दे दी।
सातवां “दूसरों की सेवा ही सबसे बड़ा धन है” → यानी लोगों की मदद करो, लोग तुम्हें ऊपर उठाएंगे रघु हर ग्राहक से मुस्कुराकर मिलता। बुजुर्गो मदद करता। गरीब बच्चों को चप्पलें बांटने लगा। उसकी दरियादिली की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई।
आठवां “संतोष वह कुंजी है जो लालच से बचाती है” → यानी लालच नहीं, संतुलन करो रघु को पैसे दिखने लगे थे, पर उसने संतोष रखा। उसने समझा— “पैसा कमाओ, पर मन का मालिक पैसा न बने।” यही संतुलन उसे सही दिशा में ले गया।
नौवां “ज्ञान सबसे बड़ा खजाना है” → यानी सीखते रहोगे तो बढ़ते रहोगे रघु ने कमाई का कुछ हिस्सा सीखने में लगाया। नए-नए कारीगरी के तरीके, मार्केटिंग, सोशल मीडिया — सब सीखा। उसका काम आधुनिक होकर दूर-दूर तक मशहूर हो गया।
दसवां “भगवान उन पर कृपा करते हैं जो खुद पर भरोसा करते हैं” → यानी आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा हथियार है अब रघु अपने काम, अपने फैसलों और अपने भविष्य पर भरोसा करने लगा था। उसने अपनी खुद की दुकान खोल ली… और फिर कुछ ही सालों में एक प्रसिद्ध दुकान का मालिक बन गए गया।
एक दिन वही लड़का, जो टूटी चप्पलों में चलता था…आज उसके पास सबकुछ था ,गाड़ी ,बंगला बैंक बैलेंस , एक अपनी चमकती दुकान के बाहर खड़ा था। तो किसी ने पूछा— आपके सफलता का राज क्या है?” रघु मुस्कुराकर बोला—Sant Ravidas Ji ki kahaniya है ,वो
Sant ravidas जी की वो 10 बातें… जिसको सुनकर समझकर एक सफल और अच्छा इंसान बन पाया दोस्तो अगर आप भी ये दस बाते जीवन में अपनाएंगे तो आपका जीवन भी सफल हो जाएगा।
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धन्यवाद, जय हिंद
