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राजा और दो नौकर की परीक्षा: विनम्रता और चरित्र की कहानी

राजा और दो नौकर की परीक्षा: विनम्रता और चरित्र की कहानी ऐसी की जीवन बदल जाए ,ये कहानी है।
एक राजा जीनका नाम विपिन वर्मा और २ नौकर की है,राजा विपिन वर्मा ने नौकरों की परीक्षा कैसी ली जानते है इस कहानी में एक बार की बात है ।
राजा विपिन वर्मा ने दो नौकर को काम पर रखा उनका नाम सोहन और राजू था । उनमें से सोहन दिखने में बहुत सुंदर था और राजू काफी बदसूरत दिखता था । राजा विपिन वर्मा ने दोनों नौकर की परीक्षा ली, राजा ने पहले (सुंदर) नौकर सोहन को बात चीत के लिए बुलाया। उससे बात चित करके पता चला और राजा विपिन वर्मा को महसूस हुआ, कि वह नौकर बुद्धिमान और मृदुभाषी है। राजा विपिन वर्मा ने उसे वापस भेज दिया और फिर दूसरे नौकर राजू को बुलाया।
नौकर की परीक्षा
राजा विपिन वर्मा ने राजू नौकर की परीक्षा के लिए बुलाया, राजा को उसका रंग रूप पसंद नही आया था ,लेकिन उसने उसकी योग्यता और गुणों को परखने का निर्णय लिया। राजा विपिन वर्मा ने राजू से कहा तुमसे पहले जो नौकर आया था वह तुम्हारी बहुत बुराई कर रहा था। लेकिन तुम्हें देखकर उसकी बातों पर यकीन नहीं होता। खैर तुम ही अपने बारे में कुछ बताओ।
राजू ने विनम्रता से उत्तर दिया यदि उसने मेरे बारे में कुछ कहा है तो सच ही कहा होगा। हो सकता है जो दोष उसने मुझमें बताए हैं, वे मुझे खुद न दिखते हों। उसकी बात सुनकर राजा ने फिर कहा मैं चाहता हूं कि तुम भी उसकी कमियों के बारे में कुछ बताओ।
राजू बोला ह्म्म वह बड़ा सच्चा इंसान है। उसमें सादगी और सच्चाई दिखती है। वह बहादुर भी है और उससे ज्यादा भला इंसान मैंने आज तक कही नहीं देखा। विपिन वर्मा ने उसे दरबार के बाहर भेज दिया और सोचा कि क्यों न पहले सोहन नौकर की परीक्षा ली जाए इससे मुझे एक ईमानदार कार्यशील नौकर मिल जाएगा।
विपिन वर्मा ने पहले वाले सोहन को दोबारा बुलवाकर , सोहन नौकर की परीक्षा लेना शुरू किया ,और कहा अभी जो नौकर राजू यहां से गया है, वह तो तुम्हारी बहुत बुराई कर रहा था। यदि मैं उसकी बातों पर ध्यान दू, तो तुम्हें इसी समय महल छोड़ कर चले जाना चाहिए। यह सुनते ही सोहन नौकर चिढ़ गया और बहुत क्रोधित हो उठा और क्रोध में बोला उस बदसूरत सा दिखने वाला राजू ने जो कुछ मेरे बारे में कहा है, वह गलत है। उसे अच्छे बुरे की परख ही नहीं है! वह लगातार अपशब्द बोलता जा रहा था।
राजा विपिन वर्मा ने उसकी कड़वी बातें सुनकर निर्णय किया किया और कहा उसका तो सिर्फ रंग रूप ही बुरा है, लेकिन तुम्हारा तो मन कुरूप है। आज से मैं तुम्हें उसका अधीनस्थ (उसके नीचे काम करने वाला) नौकर बनाता हू।और जीवन भर उसके नीचे ही कार्य करना पड़ेगा तुझे, यह सुनकर वह सोहन नौकर समझ गया कि यह एक नौकर की परीक्षा थी, जिसमें सोहन असफल रहा उसने अपनी गलती स्वीकार की और राजा विपिन वर्मा और उस राजू नौकर से माफी मांगी। और राजा विपिन वर्मा ने दोनों नौकर की परीक्षा लेकर यह साबित कर दिया , सदैव विनम्र रहो, कही न कही राजा विपिन वर्मा को भी एहसास हुआ कि “सिंहासन ऊंचा हो सकता है ,लेकिन उससे भी ऊंचा उसका मन होना चाहिए”
नैतिक शिक्षा:-
यह छोटी सी कहानी सिखाती है ,सुंदर और लुभावना रूप होते हुए भी यदि मनुष्य में अवगुण हैं, तो उसे सम्मान नहीं मिल सकता। इसके विपरीत, यदि रूप साधारण हो पर चरित्र श्रेष्ठ हो तो वह मनुष्य सदैव आदर का पात्र होता है।
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धन्यवाद, जय हिंद

Achhi kahani hai yaha par