Sant Ravidas Ji or Sant Kabir Ji
Sant Ravidas Ji or Sant Kabir Ji
राजा पीपा जी के असली गुरु कौन थे – संत रविदास या संत कबीर?
भारत के भक्ति आंदोलन में अनेक संतों ने समाज को नया दृष्टिकोण दिया, जिनमें राजा पीपा जी का नाम भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे न केवल एक राजसी परिवार से थे, बल्कि एक सच्चे साधक और संत भी बन गए। परंतु एक प्रश्न जो अक्सर उठता है – राजा पीपा जी के असली गुरु कौन थे – संत रविदास या संत कबीर? आइए ऐतिहासिक तथ्यों, परंपराओं और संत साहित्य के आधार पर इसका उत्तर विस्तार से समझें।
राजा पीपा जी कौन थे? राजा पीपा जी का जन्म 14वीं सदी में राजस्थान के गागरोण (जिला झालावाड़) में हुआ था। वे एक शक्तिशाली राजा थे, लेकिन मन में हमेशा परमात्मा की सच्ची तलाश रही। वैराग्य की भावना जागृत होते ही उन्होंने अपना राजपाट त्याग दिया और **भक्ति मार्ग** को अपना लिया।
राजा पीपा जी ने विभिन्न संतों और साधकों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें वह संतोष और आत्मिक शांति नहीं मिली जिसकी उन्हें तलाश थी। तभी उन्होंने काशी (वाराणसी) की यात्रा की, जहाँ उनकी भेंट हुई संत रविदास जी से — एक महान संत जिन्होंने जाति, भेदभाव और कर्मकांड से ऊपर उठकर सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाया।
यह व्यापक रूप से स्वीकार्य है कि संत रविदास जी ही राजा पीपा के असली गुरु थे | उनसे राजा पीपा ने जीवन का सत्य जाना। संत रविदास जी ने उन्हें सिखाया: भक्ति में जात-पात नहीं होती।
सच्चा भक्ति मार्ग अहंकार को त्यागने से शुरू होता है। बाहरी दिखावे से ऊपर उठकर “मन की निर्मलता” सबसे महत्वपूर्ण है।इसी संदर्भ में संत रविदास जी का प्रसिद्ध वाक्य है: “मन चंगा तो कठौती में गंगा”यानी अगर मन शुद्ध है, तो हर जगह गंगा का पवित्र जल है — फिर चाहे वह एक मामूली कठौती (तसला) ही क्यों न हो।
यह शिक्षा राजा पीपा के जीवन का मार्गदर्शन बनी। कुछ कबीरपंथी ग्रंथों और मान्यताओं में यह उल्लेख मिलता है कि राजा पीपा ने संत कबीर जी के उपदेशों को भी सुना और उनसे प्रभावित हुए।लेकिन इतिहास और अधिकांश संत परंपराएँ इस बात पर एकमत हैं कि राजा पीपा को दीक्षा और मार्गदर्शन संत रविदास जी से मिला था।
इसलिए संत कबीर जी के साथ केवल विचारात्मक मेल रहा, गुरु-शिष्य संबंध नहीं। गुरु ग्रंथ साहिब में राजा पीपा जी की बाणी दर्ज है, जिसमें गुरु की महिमा और निर्गुण भक्ति की बातें हैं — जो संत रविदास की शिक्षाओं से मेल खाती हैं।नाभादास कृत “भक्तमाल”, और अन्य संत साहित्य भी संत रविदास को उनके आध्यात्मिक गुरु के रूप में दर्शाते हैं।
संत रविदास जी के शिष्यों में मीरा बाई, राजा पीपा, संत धन्ना आदि प्रमुख हैं। राजा पीपा जी के असली गुरु संत रविदास जी ही थे।संत कबीर जी के विचारों से वे प्रभावित जरूर हुए, लेकिन आध्यात्मिक दीक्षा और मार्गदर्शन उन्हें संत रविदास जी से ही प्राप्त हुआ। राजा पीपा का जीवन हमें सिखाता है कि एक राजा भी अगर सत्य के मार्ग पर चले, तो वह संत बन सकता है — बशर्ते गुरु सच्चा हो और शिष्य समर्पित।
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धन्यवाद, जय हिंद

