True Friend Story in Hindi | Friendship Story
True Friend Story in Hindi | Friendship Story

True Friend | सच्चा दोस्त की दिल छू लेने वाली कहानी
कहानियां तो हमने बहुत सुनी लेकिन ये कहानी थोड़ी सी दिलचस्प है, आरव एक साधारण परिवार से था और सपने बहुत ज्यादा बड़े थे। स्कूल में वह ज़्यादा बोलता नहीं था, _ लेकिन मन एकदम खरा सोने जैसे साफ था। उसकी ज़िंदगी में नील नाम का दोस्त का आना एक मोड़ था, क्योंकि वही उसका true friend बना। दोनों साथ बैठते, साथ पढ़ते और बिना कहे एक-दूसरे की बातें समझ लेते थे। आरव को तब नहीं पता था कि एक सच्चा दोस्त ज़िंदगी में कितना ज़रूरी होता है।
जब परीक्षा का दबाव बढ़ने लगा और आरव की तबीयत बिगड़ गई, कई दोस्त दूर हो गए। मगर नील रोज़ रोज़ उसके घर आता जाता रहता, नोट्स समझाता और हिम्मत देता। उस समय आरव ने महसूस किया कि भीड़ में सिर्फ वही साथ खड़ा होता है जो true friend होता है। मुश्किल वक्त में साथ देना ही सच्चे दोस्त की असली पहचान है।
परीक्षा के बाद आरव के पिता की नौकरी भी चली गई। घर में चिंता और डर का माहौल था। कई जान-पहचान वाले मदद का वादा करके गायब हो गए। नील ने चुपचाप अपनी जमा-पूंजी आरव को दे दी ताकि पालन पोषण होता रहे । उस पल आरव की आंखों में आंसू थे, क्यों कि उसने समझ लिया था कहे न कही कि एक दोस्त कभी शर्त नहीं रखता।
कॉलेज में दोनों की राहें थोड़ी अलग सी हो गईं, लेकिन दिल जुड़े रहे। आरव दिन में पढ़ता और रात में काम करता। थक कर टूट जाता तो नील का एक फोन सब ठीक कर देता। उस समय आरव को एहसास हुआ कि true friend दूरी से नहीं, भरोसे से जुड़ा होता है।
एक दिन आरव की नौकरी लगभग छूट गई। किराया, जिम्मेदारी और तनाव सब एक साथ ही आ गए थे। कई लोग सलाह देने आए, परन्तु कोई साथ देने कोई नहीं आया। लेकिन नील ने अपने छोटे से कमरे में आरव के लिए जगह बना दी। आरव ने जाना कि true friend सच्चा साथी वही है जो अपना आराम भी बांट लेता है ।
वक्त बीतता गया ,धीरे-धीरे हालात बदले। आरव को नई नौकरी मिली। पहली सैलरी लेकर वह नील के पास पहुंचा और पैसे लौटाने की बात की। नील मुस्कुराया और मना कर दिया। उस मुस्कान में अपना पन था, क्योंकि true friend देने लेने के बाद हिसाब नहीं करते ।
समय के साथ आरव सफल बन गया। एक मंच पर उसने अपनी कामयाबी का श्रेय नील को दिया। भीड़ तालियाँ बजा रही थी, लेकिन आरव जानता था कि true friend हमेशा परदे के पीछे रहकर चमक देता है। सफलता में भी जिसने हाथ थामा, वही असली सच्चा दोस्त होता है।
ज़िंदगी में बहुत से लोग मिलते हैं, लेकिन जो मुश्किल में भी साथ खड़ा रहे, वही true friend होता है। पैसा, पद और पहचान बदल सकती है, पर सच्ची दोस्ती नहीं। जब हालात परीक्षा लें, तब पहचानिए कि आपका true friend कौन है।
नैतिक शिक्षा –
“A true friend is not found in happiness, but recognized in hardship”
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धन्यवाद, जय हिंद

Ye page mujhe bachpan ki kahaniyon ki yaad dilata hai jise bachpan me ham kahni padhte the