मकर संक्रांति क्यों मनाते है?

Makar Sankranti मकर संक्रांति क्यों मनाते है?

 

हम सब मकर संक्रांति या खिचड़ी का त्यौहार बड़े प्यार से मनाते है,और हम में से बहुत लोग ये नहीं जानते है ये 14 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है ? ये सिर्फ एक त्यौहार नहीं बहुत बड़ी खुशियों की सौगात है। इसे हम क्यों इतने प्यार से मनाते है , बच्चे पतंगे उड़ाते है ,जानते है रामू काका से,

 

 ठंडी सुबह और बदलता हुआ आसमान का रंग क्या कहता है, Makar Sankranti के बारे में

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? Makar Sankranti

सर्दियों की एक शांत सुबह थी। गांव के बाहर खेतों में ओस चमक रही थी। रामू काका अपने खेत में खड़े होकर उगती हुई धूप को बड़े प्यार से निहार रहे थे। आज सूरज कुछ अलग ही लग रहा था—नरम, सुनहरी और सुकून देने वाला,जैसे गर्मी के मौसम में छास और लस्सी।

 

पास में खड़ा छोटा मोनू बोला,जो उनके बड़े भाई का लड़का है ,उसने पूछा “काका, आज सूरज इतना अच्छा क्यों लग रहा है ? क्यों इतना चमक रहा है?”

रामू काका मुस्कुराते हुए बोले, “बेटा, आज मकर संक्रांति है। आज से सूरज उत्तरायण होता है।” मोनू ने फिर पूछा मासूम सा चेहरा लेकर उत्तरायण मतलब?

ये भी पढ़ेंSwami Vivekananda ji ki Bhoot Wali kahani

सूर्य का संदेश क्या कहता है, makar Sankranti के बारे में

 

मकर संक्रांति

रामू काका ने मोनू को समझाया, “आज सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसका मतलब यह है, कि अब ठंड धीरे-धीरे कम होगी, दिन लंबे होंगे, और धरती फिर से मुस्कुराएगी।”

मोनू ध्यान से सुन रहा था, जैसे सूरज की हर किरण कोई कहानी सुना रही हो।

 

खेतों की खुशियां

चारों तरफ खेतों में हलचल सी थी। गेहूं की बालियां पक चुकी थीं,सरसों के फूल हवा में लहरा रहे थे।आगे रामू काका बोले,मोनू से मोनू “मकर संक्रांति किसानों के लिए त्योहार है।ये हमारी मेहनत का इनाम है। इसी खुशी में हम भगवान और प्रकृति का धन्यवाद करते हैं।”

 आकाश में उड़ती पतंगे कुछ कहती है

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? Makar Sankranti

दोपहर होते-होते गांव का आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया।बच्चों की हंसी, ढोल की आवाज़ और गुड़-तिल की मिठास हर तरफ फैल गई। मोनू के मन में फिर एक सवाल आया ,मोनू ने लड्डू खाते हुए पूछा,

“काका, तिल-गुड़ ही क्यों खाते हैं?” फिर रामू काका बोले,बेटे “क्योंकि ये शरीर को गर्म रखते हैं और सिखाते हैं—मीठा बोलो, मीठा बनो।”

 

दान और मानवता का क्या महत्व

शाम को गांवों के लोग जरूरतमंदों को अन्न और कपड़े दान कर रहे थे। रामू काका बोले, देखो मोनू ऐसा माना जाता है कि “आज जो दिया जाता है, वो कई गुना लौटकर आता है। खिचड़ी अपनो में मेलजोल करना और एक अच्छा इंसान बनना सिखाती है।”

मकर संक्रांति या खिचड़ी

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? Makar Sankranti

रामू काका ने आगे मोनू से कहा कि, भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति अलग-अलग नामों से भी मनाई जाती है,जैसे

उत्तर भारत – मकर संक्रांति,खिचड़ी

गुजरात – उत्तरायण (पतंग उत्सव)

तमिलनाडु – पोंगल

असम – माघ बिहू

पंजाब – लोहड़ी

और भी बहुत नाम है, हर राज्य में परंपराएं अलग हैं, लेकिन भावना एक ही है – खुशी और कृतज्ञता से जीवन में नई उमंग लाना,जिससे जीवन में आनंद बना रहे ।

 

मकर संक्रांति संदेश

 रामू काका मोनू से कहते है, मकर संक्रांति सिर्फ एक तारीख  नहीं,बल्कि ये परिवर्तन, उम्मीद और कृतज्ञता की नई किरण की कहानी है। जैसे सूरज दिशा बदलता है, वैसे ही हमें भी जीवन में अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ना चाहिए और जहां तक  जो  सके लोगों की मदद करना चाहिए।

मोनू बाद ढेर सारे लड्डू खाते खाते गांव में उछल कूद करता है ,अपने सभी दोस्तों  रीना ,टीना,रोहित और सभी को  Makar Sankranti के सब बाते बताता है  जो उसे रामू काका ने बताई थी कुछ समय पहले ,ऐसे ही जीवन में Makar Sankranti खुशियां लेकर आती ,है 14 जनवरी की नई किरण जीवन को नया बनाने के लिए ।

ऐसी ही कहानियां देखने और पढ़ने के लिए Youtube channel @Storiesbygulabgautam और पेज www.Hindistories24.Com को भी सेव करके रखे

धन्यवाद, जय हिंद

One thought on “मकर संक्रांति क्यों मनाते है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *