अकबर और बीरबल और दो गधों का बोझ | प्रसिद्ध प्रेरणादायक कहानी
अकबर-बीरबल और दो गधों का बोझ की कहानी हमने बहुत सी कहानी सुनी है अकबर और बीरबल की इस…
अकबर-बीरबल और दो गधों का बोझ की कहानी
हमने बहुत सी कहानी सुनी है अकबर और बीरबल की इस कहानी में भी आपको आनंद आयेगा ।
एक बार की बात है ,मुगल दरबार में एक दिन बड़ा ही रोचक दृश्य था। बादशाह अकबर अपने शाही बाग में टहलने निकले। उनके साथ हमेशा की तरह बुद्धिमान मंत्री बीरबल और कुछ खास लोग जैसे नौ रत्नों में से भी कुछ लोग थे।
और मौसम सुहावना था। चारों तरफ़ हरियाली फैली हुई थी। चलते-चलते अकबर को गर्मी महसूस होती है । उन्होंने अपना भारी शाही शाल जो हमेशा अपने साथ रखतें है,उसे उतारा और मुस्कुराते हुए बीरबल की ओर बढ़ा दिया।

बीरबल ने बिना कुछ कहे शाल अपने कंधे पर रख लिया।थोड़ी दूर चलने के बाद अकबर ने अपनी तलवार भी उतारकर बीरबल को दे दी। अब बीरबल के एक कंधे पर शाल और दूसरे हाथ में तलवार थी। कुछ दूरी और चलने पर अकबर ने मज़ाक करते हुए कहा,
“बीरबल, अब तो तुम्हारे कंधों पर एक गधे का बोझ आ गया होगा! और वहां सभी “दरबारियों ने बादशाह की बात सुनकर ज़ोर से हंसना शुरू कर दिया, हाहाहाहा । लेकिन बीरबल शांत रहे। उन्होंने विनम्रता से मुस्कुराकर उत्तर दिया, “हुज़ूर, एक नहीं… दो गधों का बोझ है। मुझपर “यह सुनते ही पूरा दरबार एकदम शांत हो गया,और सब बीरबल को देखने और सब आश्चर्य चकित हो गए।
अकबर ने आश्चर्य से पूछा ही लिया , “दो गधों का बोझ ? मतलब कहना क्या चाहते हो , बीरबल सभी को बताओ, तो दूसरा गधा कहा है?और किस हालत में है उसके बारे में बताओ फिर ” बीरबल ने सिर झुकाकर आदरपूर्वक कहा, “महाराज, आपके शाल और तलवार का भार तो मेरे कंधे पर पहले से ही है ,और जिसने यह सब मुझ पर रखा है, उसका बोझ भी कही न कही मैं ही उठा रहा हु। इसलिए एक नहीं, दो गधों का बोझ है।”
कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। फिर अकबर ज़ोर से हंस पड़े।उन्होंने बीरबल की हाज़िर जवाबी की प्रशंसा की और कहा,”बीरबल, तुम्हारी बुद्धि का कोई मुकाबला नहीं। तुमने बिना मेरा अपमान किए मुझे विनम्रता का पाठ पढ़ा दिया और यहां सबको समझा भी दिया ।”इसके बाद अकबर ने अपना शाल और तलवार स्वयं वापस ले ली। दरबारियों ने भी समझ लिया कि बुद्धिमान व्यक्ति अपमान का उत्तर क्रोध से नहीं, बल्कि सूझबूझ से जवाब दे देता है। और इसी में सबकी मान मर्यादा बनी रहती है । इसके बाद सभी ने तालियां बजाकर बीरबल का अभिवादन किया और बीरबल ने मूंछों को ताव देते हुए सबको धन्यवाद बोला।
कहानी से मिलने वाली सीख
किसी ने सही कहा है,अहंकार का उत्तर बुद्धिमान व्यक्ती बुद्धिमानी से देता है । सच्ची बुद्धि वही है जो किसी का अपमान किए बिना सच कह सके। विनम्रता ही सबसे बड़ा आभूषण जीवन का ,हाज़िर जवाबी कठिन परिस्थितियों को भी आसान बना देती है।
अकबर-बीरबल की “दो गधों का बोझ” वाली कहानी केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि यह सिखाती है कि सम्मान, विनम्रता और बुद्धिमानी किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत होती हैं। बीरबल ने अपनी चतुराई से यह साबित कर दिया कि सही समय पर बोले गए समझदारी भरे शब्द किसी भी तलवार से अधिक प्रभावशाली होते हैं।
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धन्यवाद, जय हिंद
