कबूतर और शिकारी की कहानी | Panchatantra Story in Hindi

file 00000000de40821193142b07509583f9

कबूतर और शिकारी की कहानी | Panchatantra Story in Hindi

 

परीचय

नमस्कार दोस्तों! आपका स्वागत है www.HindiStories24.com पर। मैं गुलाब कुमार-लेखक  और यहाँ हम आपके लिए लाते हैं ऐसी सच्ची, प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ, जो सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि ज़िंदगी में कुछ अच्छा सीखने के लिए होती हैं।

आज की कबूतर और शिकारी की कहानी भी बिल्कुल ऐसी ही है। सफलता, संघर्ष और जीवन की एक बड़ी सीख से भरी हुई। इसे आसान और अपनेपन वाली भाषा में लिखा गया है, ताकि पढ़ते-पढ़ते लगे जैसे कोई अपना किस्सा सुना रहा हो।

तो चलिए, बिना समय गंवाए शुरू करते हैं आज की शानदार कबूतर और शिकारी की कहानी।

बहुत समय पहले विजय नगर के घने जंगल में एक बड़ा विशाल पीपल का पेड़ था। उसी पेड़ पर कबूतरों का एक बड़ा परिवार रहता था। उनके राजा का नाम सुग्रीव था। वह बुद्धिमान, धैर्यवान और तार्किक था। उसके साथ तीन साथी भी रहते थे उनका नाम सुवर्चस , पद्माक्ष और शुभ्रिका। चारों मिलकर पूरे झुंड की हमेशा रक्षा करते थे।

कबूतर और शिकारी की कहानी

कबूतर और शिकारी की कहानी का दृश्य 

जंगल में पड़ा सूखा

एक साल जंगल में भयंकर सूखा पड़ गया। सारी नदियाँ सूखने लगीं और खेतों में दाने मिलना बंद हो गए। छोटे कबूतर भूख से परेशान होने लगे। एक सुबह सभी भोजन की तलाश में उड़ रहे थे। तभी सुवर्चस ने नीचे चमकते हुए चावल के दाने देखे। महाराज! नीचे बहुत सारा भोजन है,उसने उत्साहित होकर कहा।

सुग्रीव ने ध्यान से चारों ओर देखा। जंगल के बीच इतनी मात्रा में चावल देखकर उसे संदेह हुआ। उसने कहा, सावधान रहो। बिना सोचे नीचे मत उतरना। लेकिन भूख इतनी अधिक थी कि पद्माक्ष और कुछ युवा कबूतर नीचे उतर गए। शुभ्रिका भी उन्हें रोक नहीं पाई। अंत में पूरा झुंड नीचे आ  गया, भोजन के लालच में।

सबने गहरी सांस ली और विचार बनाया देना चुगने का ,जैसे ही सभी दाने चुगने लगे, अचानक ऊपर से एक बड़ा जाल गिर पड़ा। सभी कबूतर उसमें बुरी तरह उस जाल में फंस गए।

झाड़ियों के पीछे छिपा शिकारी व्याधकेतु मुस्कुराता हुआ बाहर आया। उसने कहा, मै तो एक ,दो की तलाश में था,आज तो पूरा झुंड एक साथ मिल गया और जोर जोर से हंसने लगा।

छोटे कबूतर घबराकर रोने लगे। कोई पंख फड़फड़ाने लगा, कोई जाल काटने की कोशिश करने लगा। लेकिन सुग्रीव शांत रहा।

तरकीब काम कर गई

सुग्रीव ने तेज आवाज़ में कहा, तुम सब घबराओ मत अगर हम अलग-अलग कोशिश करेंगे, तो कोई नहीं बचेगा। मेरी गिनती पर सभी एक साथ उड़ेंगे। सभी कबूतरों ने अपने पंख फैलाए।

एक… दो… तीन!

पूरे झुंड ने एक साथ जोर लगाया। धीरे-धीरे जाल ज़मीन से उठने लगा।व्याध केतु शिकारी हैरान रह गया। उसने ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा था। कबूतर जाल सहित आसमान में उड़ गए और शिकारी उनके पीछे दौड़ पड़ा। लेकिन सुग्रीव जानता था ,कि जंगल में उसका एक पुराना मित्र रहता है, जो उनकी आखिरी उम्मीद था।

सुग्रीव अपने साथियों को लेकर तेजी से जंगल के भीतर उड़ता गया। जाल भारी था, लेकिन सभी कबूतर एक साथ पंख फड़फड़ा रहे थे। पीछे-पीछे शिकारी व्याध केतु दौड़ रहा था। उसे पूरा विश्वास था कि कबूतर कुछ ही देर में थककर नीचे गिर जाएंगे।

file 000000002c308211ba7f87e9bc764871

कबूतर और शिकारी की कहानी का दृश्य

मिला दोस्त का साथ

थोड़ी दूर उड़ने के बाद चित्रग्रीव बोला, साथियों, हिम्मत मत हारना। हमारा मित्र मूषक पास ही रहता है। वही हमारी मदद करेगा।

कुछ समय बाद वे एक पुराने बरगद के नीचे जा पहुंचे। वहाँ मिट्टी के भीतर मूषक नाम का बुद्धिमान चूहा रहता था। सुग्रीव ने आवाज़ लगाई, मित्र मूषक! बाहर आओ, हम बड़ी मुसीबत में हैं।हमे तुम्हारे मदद की जरुरत है।

मूषक पहले डर गया। उसने सोचा कोई शिकारी उसे बुला रहा है। लेकिन जब उसने सुग्रीव की आवाज़ पहचानी, तो तुरंत बाहर निकल आया।उसने देखा कि पूरा कबूतरों का झुंड जाल में फंस गया है। उसकी आँखें भर आईं। मूषक ने बोला, मित्र, चिंता मत करो। मैं अभी जाल कुतर देता हु।

वह सबसे पहले सुग्रीव की रस्सी काटने लगा। तभी सुग्रीव ने उसे रोक दिया। नहीं मित्र, सुग्रीव बोला, पहले मेरे साथियों को मुक्त करो। राजा सबसे अंत में आज़ाद होगा। मूषक मुस्कुराया। उसे अपने मित्र का निस्वार्थ स्वभाव देखकर गर्व हुआ। उसने एक-एक करके  सुवर्चस ,   पद्माक्ष और शुभ्रिका सहित सभी कबूतरों को जाल से मुक्त कर दिया। अंत में सुग्रीव भी आज़ाद हो गया।

इसी बीच शिकारी आ गया। उसने देखा कि जाल खाली पड़ा है और सारे कबूतर उड़ चुके हैं। वह निराश होकर बैठ गया और बोला, आज मेरी लालच और घमंड दोनों हार गए।

सभी कबूतर फिर से आसमान में उड़ गए। उन्होंने बरगद के पेड़ पर लौटकर अपने मित्र मूषक का धन्यवाद किया।

सुग्रीव ने पूरे झुंड से कहा, आज अगर हम डरकर अलग-अलग कोशिश करते, तो कोई नहीं बचता। हमारी एकता और सच्ची दोस्ती ने हमें जीवन दिया।

कबूतर और शिकारी की कहानी

कबूतर और शिकारी की कहानी का दृश्य

जल्दबाजी नहीं करना चाहिए

सुवर्चस  बोला, मैंने जल्द बाज़ी में आपकी बात नहीं मानी थी। आगे से बिना सोचे कोई निर्णय नहीं लूंगा। पद्माक्ष ने कहा, भूख बड़ी थी, लेकिन सावधानी उससे भी बड़ी होनी चाहिए। शुभ्रिका मुस्कुराई और बोली, “सच्चा मित्र वही है जो संकट में साथ खड़ा रहे।”

उस दिन से कबूतरों ने एक नियम बनाया,हर निर्णय मिलकर लिया जाएगा और किसी भी संकट में कोई साथी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।जंगल के सभी जानवरों ने इस घटना से सीख ली। हाथी ने कहा, “एकता सबसे बड़ी शक्ति होती है।” हिरण बोला, “सच्ची दोस्ती जीवन बचा सकती है।”

सुग्रीव ने आकाश की ओर देखते हुए कहा, जब मन एक हो और विश्वास मजबूत हो, तब सबसे बड़ा जाल भी हमें कैद नहीं कर सकता और उस दिन से विजयनगर जंगल में यह कबूतर और शिकारी की कहानी पीढ़ियों तक सुनाई जाने लगी।

कहानी की सीख (Moral)

कबूतर और शिकारी की कहानी हमें सिखाती है कि आज अपने परिवार, दोस्तों या साथ काम करने वालों के साथ मिलकर काम करें, अकेले नहीं। अगर किसी बात पर मतभेद हो, तो झगड़ा करने के बजाय बैठकर बात करें और एक-दूसरे का साथ दें। यही एकता आपको बड़ी मुश्किलों से भी बाहर निकाल सकती है।

कबूतर और शिकारी की कहानी यही सिखाती है ,मैं किसी अपने का साथ नहीं छोड़ना चाहिए, मुश्किल समय में मिलकर समाधान ढूंढना और जल्द बाज़ी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।

जीवन भी बिल्कुल इस तरह ही है, अगर हमें भी भोजन न मिले तो हम कुछ भी करने को तैयार हो जाएंगे ,लेकिन कबूतर और शिकारी की कहानी में जो सुग्रीव ने कहा ,हमे कदम उठाने से पहले जांच परख लेना चाहिए क्या गला है और क्या सही ताकि हम भी कही कबूतर और शिकारी की कहानी के जैसे जाल में न फंस जाए।

 

ऐसी ही कबूतर और शिकारी की कहानी देखने और पढ़ने के लिए Youtube channel @Storiesbygulabgautam और पेज www.Hindistories24.Com को भी सेव करके रखे

धन्यवाद, जय हिंद 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

6 Yoga aasana for cough Reliver Swami Vivekanand ji Thoughts in Hindi Navratri 2025 ki exact dates & days & more संत रविदास जी की 5 बातें, जो हम सबको अपने जीवन में माननी चाहिए | sant Ravidas ji भगवान बुद्ध की 5 बातें, जो हमें अपने जीवन में ज़रूर माननी चाहिए | buddha ki bate 5 great New Year’s resolutions for 2026