Friendship story in hindi | खरगोश और कछुआ

Friendship story in hindi |खरगोश और कछुआ

Friendship story in hindi

Friendship story in hindi | बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में दो घनिष्ठ मित्र रहते थे,घनिष्ठ मित्र यानी जी और जान उनकी कहानी हम सब ने सुनी हैं आज हम फिर उनकी बात करने वाले हैं खरगोश और कछुए की हरे-भरे जंगल में एक सुंदर मैदान हुआ था। जहां हर सुबह चहचहाहट चिड़ियों की,रंग बिरंगी तितलियां की मुस्कान से होती ,हर जानवर खेलकूद में मग्न रहते थे, खाते पीते और मस्त रहते थे।

इसी जंगल में दो बिल्कुल अलग स्वभाव के लोग दो मित्र एक जान कहे जाने वाले रहते थे, (बाबू) खरगोश और (गोलू)कछुए का नाम था, तो बात करें खरगोश की तो वह हमेशा इधर-उधर उछलता कूदता रहता,तेज दौड़ता और बिना रुके बातें करता ,दूसरी ओर कछुआ जो है बहुत शांत समझदार का व्यक्तित्व रखने वाला हमेशा खुश रहता था।

Friendship story in hindi

बाबू जहां भी जाता, गोलू उसके पीछे-पीछे ,धीरे-धीरे आ जाता ,सभी गोलू के समझदारी और धैर्य तारीफ करते और बाबू को कभी-कभी लोग चढ़ाते हैं, लेकिन कहीं ना कहीं उसे यह भी अच्छा लगता की बाबू उसका दोस्त है।

 एक दिन जंगल के एक खूंखार शेर जो उनके किंग थे,जंगल में ऐलान करते है क्यों ना,एक दौड़ हो जाए,जो भी जीतेगा उसे जंगल का सबसे बुद्धिमान और मेहनती जीव माना जाएगा ,सभी जानवर बहुत खुश थे, बाबू तो खुशियों से झूम रहा था ,वह जानता था कि उसकी तेज रफ्तार के सामने कोई नहीं टिक पाएगा ,जब सब लोग मिले सब बातें कर रहे थे ,सब हंस रहे थे। सब ने दौड़ने से मना कर दिया ,फिर गोलू जो खरगोश का मित्र था उसने कहा मैं दौड़ लगाऊंगा ।

सबने सोचा गोलू कैसे जीत पाएगा ,बाबू से ,वो कितना फुर्तीला है और गोलू कितना धीरे चलता है ,फिर सब ने सोचा चलो देखते हैं क्या होता है ,बाबू भी सोचने लगा कि गोलू मुझे कैस हर सकता है और मुझसे कैसे जीत सकता है, दौड़ शुरू होती है बाबू बिजली की गति से तेज दौड़ रहा होता है।

वह इतनी तेज दौड़ रहा होता है कि कुछ ही मिनट में गोलू को पीछे छोड़ देता है ,दौड़ का रास्ता जंगल के पेड़ों से होकर गुजरता है , गोलू धीरे धीरे आगे बढ़ता जाता है , बाबू  पीछे मुड़कर देखता है,गोलू कहीं नहीं दिख रहा था ।

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ठंडी हवा बह रही थी और फूल पत्तियां जो है वह मस्त मगन हो रहे थे , बाबू ने सोचा कि क्यों न थोड़ा आराम किया  जाए और जल्द ही बाबू की आंख लग गई है,और गोलू  धीरे-धीरे चलते चलते आते हैं ,आगे बिना रुके आगे बढ़ते रहता हैं, उसने बबाबू की तरह आराम नहीं किया ।

 बाबू को देखा और आगे बढ़ते चले गया और किसी से बात नहीं की बस अपने लक्ष्य पर केंद्रित ध्यान रखा और फिनिश लाइन तक पहुंच गया और हमेशा की तरह बाबू जहां था, वहां सोते-सोते रह गया , बाबू उठा उसने जल्दी से चारों ओर देखा झटपट झटपट दौड़ने लगा । लेकिन जब वह फिनिश लाइन तक पहुंचा , तब उसे पता चला कि गोलू पहले ही पहुंच चुका है, बाबू के चेहरे पर थोड़ी सी हैरानी थी ,यह कैसे हो सकता है ,उसने सोचा उसे यकीन नहीं हो रहा था ।

बाबू तेज दौड़कर भी हार गया, लेकिन इस हार से उसने बहुत कुछ सीखा अपने दोस्त के पास गया और कहां गोलू महाराज तुम सच में बहुत समझदार  भी हो और मेहनती भी हो । मैं तो रास्ते में ही सो गया था गोलू ने हंसते हुए ,बोला बाबू दौड़ तो सिर्फ बहाना थी, असली जीत तो खुद पर विश्वास और निरंतर मेहनत से मिलती है धीरे-धीरे गोलू की सोच और उसकी सादगी  से बाबू को प्यार हो गया।

 गोलू को भी बाबू की ऊर्जा और मासूमियत पसंद थी, गोलू ने  कहा मुझे प्यार रफ्तार से नहीं दिल की गहराइयों से पसंद है, उस दिन के बाद खरगोश और कछुआ की यह अनोखी जोड़ी जंगल की सबसे प्यारी जोड़ी बन गई।

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 एक दूसरे की कमियों को पूरा करते और हमेशा साथ रहते हैं खरगोश को सिखाया देख जिंदगी की खुशियों में हमेशा प्रेम  रहना चाहिए और हमेशा दोस्ती बनी रहना चाहिए, इसके बाद खरगोश और कछुए की प्यारी दोस्ती हमेशा एक दोस्ती की  मिसाल बनकर रह गई ,जंगल में और हमेशा उन दोनों के बीच एक खूबसूरत रिश्ता बना रहा ।

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धन्यवाद,

 जय हिंद

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