सिंह और खरगोश की कहानी | Panchatantra Story in Hindi | बुद्धि से जीता बलवान
सिंह और खरगोश की कहानी
एक अनोखी कहानी है,जो आपके बच्चों के दिल को छू जाएगी।ये कहानियां सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है, ये मनोरंजन के साथ साथ जीवन को सार्थक बनाने में भी योगदान देती है। दोस्तों मैं गुलाब कुमार आप सभी का स्वागत करता हु। हमारे हिंदीस्टोरीज24.कॉम पर यहां आपको मिलेगा। हिंदी कहानियों का संग्रह। सिंह और खरगोश कहानी एक प्रसिद्ध कहानी है।
यह सिंह और खरगोश शुरू होती है, एक समय पहले एक घना और सुंदर विजय नगर नाम का जंगल था। उस विजय नगर जंगल में तरह-तरह के जानवर रहते थे।

सिंह और खरगोश कहानी का दृष्य
जंगल हरा-भरा था, पेड़ों पर पक्षी चहचहाते थे और चारों ओर छोटी-बड़ी नदियाँ और जलाशय थे। देखने में वह जंगल बहुत शांत और सुंदर लगता था, लेकिन वहा रहने वाले जानवर एक भयानक डर के मारे में जी रहे थे। ऐसा क्या था उस जंगल की सारे जानवर डर डर कर जी रहे थे।
सभी जानवरों का परिचय
विजय नगर जंगल में एक शक्तिशाली सिंह और खरगोश गोलू रहता था। उसका सिंह का नाम सुरक और खरगोश का नाम गोलू था।लेकिन सुरक बहुत बलवान और क्रूर वही गोलू मासूम छोटा खरगोश। सुरक को अपनी ताकत पर इतना घमंड करता था, कि विजयनगर जंगल में जब चाहे किसी भी जानवर का शिकार कर लेता। उसे भूख लगे तो वह हिरण, जंगली सूअर, भैंस या खरगोश,किसी को भी पकड़ लेता, परेशान करता।
सबसे बड़ी समस्या यह थी कि सिंह अपनी जरूरत से कहीं अधिक जानवरों को शिकार करता था। इस कारण जंगल के जानवर हमेशा भयभीत रहते थे।
हर सुबह जब कोई जानवर अपने बच्चों को लेकर भोजन की तलाश में निकलता, तो उसके मन में यही डर रहता कि कहीं रास्ते में सिंह सुरक न मिल जाए। धीरे-धीरे जंगल के सभी जानवर परेशान हो गए।
सबने निर्णय लिया गया
एक दिन हिरण, खरगोश, जंगली सूअर, बंदर, नीलगाय और दूसरे जानवरों ने मिलकर एक सभा बुलाई। आगे क्या किया जाए।सभा में से एक बुजुर्ग हिरण ने कहा,यदि हम इसी तरह डरकर जीते रहे, तो एक दिन हमारा पूरा जंगल खाली हो जाएगा। दूसरे जानवर ने कहा,लेकिन हम उस शक्तिशाली सिंह का मुकाबला कैसे कर सकते हैं? कुछ देर तक सभी चुप रहे।
तभी एक समझदार जानवर ने सुझाव दिया, हम सुरक सिंह से एक समझौता क्यों नहीं कर लेते? यदि वह हर दिन शिकार करने के लिए जंगल में घूमना बंद कर दे, तो हम रोज़ अपनी ओर से एक जानवर उसके पास भेज देंगे। सभी को यह विचार अच्छा लगा।
जानवरों का एक दल सिंह के पास पहुंचा। उन्होंने विनम्रता से कहा,महाराज सुरक, आप जंगल के सबसे शक्तिशाली प्राणी हैं। हम आपसे लड़ना नहीं चाहते। लेकिन यदि आप इसी तरह कई जानवरों को रोज़ शिकार करते रहे, तो एक दिन जंगल में कोई जीवित नहीं बचेगा।
सिंह ने गरजते हुए पूछा,तो तुम क्या चाहते हो? जानवरों ने कहा,हम रोज़ स्वयं एक जानवर आपके भोजन के लिए भेजेंगे। आपको शिकार करने के लिए जंगल में घूमने की आवश्यकता नहीं होगी। सिंह ने कुछ देर सोचा।
उसे यह प्रस्ताव पसंद आया, क्योंकि अब उसे शिकार करने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। उसने कहा,ठीक है। लेकिन याद रखना, यदि किसी दिन मेरा भोजन समय पर नहीं मिला, तो मैं फिर से पूरे जंगल में शिकार करने निकल जाऊंगा और जो मेरा मन करेगा वो करूंगा और हंसने लगा।
सभी जानवरों ने उसकी शर्त स्वीकार कर ली।अब हर दिन एक जानवर स्वयं सिंह की गुफा में जाने लगा।किसी दिन हिरण जाता, किसी दिन जंगली सूअर, किसी दिन नीलगाय और किसी दिन कोई दूसरा जानवर।
खरगोश की बारी आई
जंगल में पहले से कम डर था, लेकिन हर परिवार को यह चिंता रहती कि अगली बारी किसकी होगी। यही वह दिन था जहां सुरक को चुनौती मिलने वाली थी, उस दिन छोटे से खरगोश की बारी आ गई। वह बहुत छोटा था। उसका नाम गोलू था।
जब दूसरे जानवरों ने उसे सिंह के पास जाने के लिए कहा, तो वह घबराया नहीं। वह कुछ देर सोचता रहा। उसने मन ही मन कहा,मैं छोटा जरूर हू , लेकिन मेरे पास बुद्धि है। यदि मैं अपनी बुद्धि का उपयोग किया तो शायद सुरक सिंह से बचने का कोई रास्ता मिल सकता है।
वह जानबूझकर धीरे-धीरे सिंह की गुफा की ओर चलने लगा। रास्ते में उसे एक पुराना गहरा कुआँ दिखाई दिया। खरगोश ने कुएं में अंदर देखा।नीचे साफ पानी था। अचानक उसके मन में एक उपाय आया। वह मुस्कुराया और बोला,अब शायद जंगल के सभी जानवरों को बचाया जा सकता है।
सिंह और खरगोश की मुलाक़ात
खरगोश जानबूझकर सिंह की गुफा में देर से पहुंचा। सुरक पहले से ही बहुत भूखा था। जैसे ही उसने खरगोश को देखा, वह गुस्से से गरजा,तुम इतनी देर से क्यों आए? क्या तुम्हें पता नहीं कि मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हू?ऐसे ही वह चिल्ला रहा था।
खरगोश डरने का अभिनय करते हुए बोला,महाराज मेरी गलती नहीं है,सिंह ने और जोर से गरजकर पूछा,तो फिर किसकी गलती है? खरगोश बोला,महाराज, हम आपके लिए अकेले नहीं आ रहे थे। आज आपके भोजन के लिए छह खरगोश भेजे गए थे। हम सभी आपके पास आ रहे थे। लेकिन रास्ते में हमें एक दूसरा सिंह मिल गया।
सिंह चौंक गया। दूसरा सिंह? जी महाराज,खरगोश ने कहा। सिंह का क्रोध और बढ़ गया। मेरे जंगल में दूसरा सिंह आने की हिम्मत कैसे कर सकता है? वह कहाँ है? मुझे बताओ।
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खरगोश ने डरते हुए कहा,महाराज, वह बहुत शक्तिशाली है। उसने हमें रोक लिया और कहा कि वही इस जंगल का राजा है। यह सुनकर सुरक का अहंकार जाग उठा। वह गरजकर बोला,मुझे अभी उसके पास ले चलो!
खरगोश बोला,महाराज, वह बहुत खतरनाक है। मैं आपको वहा ले जाने से डर रहा हू। सिंह ने कहा, चिंता मत करो। मुझे कोई नहीं हरा सकता। तुम मुझे तुरंत उसके पास ले चलो। खरगोश सिंह को उसी पुराने कुएं के पास ले गया।
सिंह ने लगाया दहाड़
फिर गोलू ने धीरे से कहा, महाराज, वह इसी कुएं के अंदर छिपा हुआ है। सिंह ने कुएं के अंदर देखा। उसे पानी में अपना ही प्रतिबिंब दिखाई दिया। उसे लगा कि सचमुच कुएं के अंदर दूसरा सिंह मौजूद है। सिंह ने जोर से दहाड़ लगाई। कुएं से उसकी आवाज़ की गूंज वापस आई। उसे लगा कि दूसरा सिंह भी उसे चुनौती दे रहा है।
ये सब होते हुए,छोटा खरगोश गोलू सब देख रहा था,और सोच रहा था। यह करना गलत है,लेकिन अगर नहीं किया तो ये हम सबका शिखर कर। पूरे विजय नगर जंगल को खत्म कर देगा।उससे तो अच्छा है आज ही सुरक का समाधान हो जाए। वह सोच रहा था ,तभी अचानक
सुरक क्रोधित होकर बोला,तो तुम मुझे चुनौती दे रहे हो! उसने बिना सोचे कुएं में छलांग लगा दी। लेकिन वह कोई दूसरा सिंह नहीं था।वह उसका अपना प्रतिबिंब था।
गहरा कुआँ होने के कारण सिंह बाहर नहीं निकल सका और वहीं उसका अंत हो गया। चतुर खरगोश तुरंत वहा से भागकर जंगल में पहुंचा। सुरक सिंह और खरगोश गोलू अपनी सारी बात बताई।
सभी बहुत खुश हुए।जानवरों ने कहा,आज एक छोटे से खरगोश की बुद्धि ने पूरे जंगल को बचा लिया! उस दिन के बाद जंगल के जानवर बिना डर के रहने लगे।
सुरक सिंह और खरगोश गोलू ने किसी को अपनी ताकत से नहीं हराया था। उसने केवल सही समय पर शांत रहकर अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया और सुरक को सबक सिखाया ।
सिंह और खरगोश कहानी की सीख (Moral)
अहंकार इंसान या किसी भी प्राणी की सबसे बड़ी कमजोरी बन सकता है। सिंह अपनी ताकत के घमंड में इतना अंधा हो गया कि उसने अपने प्रतिबिंब को भी अपना दुश्मन समझ लिया।
यह सिंह और खरगोश की कहानी बुद्धि और बल के अंतर को दिखाने वाली प्रसिद्ध किस्सा है। एक विद्वत अध्ययन भी इस कथा का सार यही बताता है ,कि बुद्धिमत्ता से सफलता और मूर्खता से विनाश हो सकता है।
हमेशा बुद्धि, बल से बड़ी होती है। जहा जो चाहिए वो लगाना चाहिए।मन को शांत रखे तो ,सिंह और खरगोश की कहानी से सिखने को मिलेगा की अहंकार के आगे। सब फीके पड़ जाते है।
किसी समस्या के सामने केवल ताकत दिखाना जरूरी नहीं है। शांत दिमाग से सोचकर सही उपाय खोजा जाए तो बहुत बड़े संकट को भी टाला जा सकता है। जैसे सिंह और खरगोश की कहानी में हुआ।
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धन्यवाद, जय हिंद



