बंदर और मगरमच्छ | Panchatantra Story in Hindi
अनोखी कहानी बंदर और मगरमच्छ
एक समय पहले समुद्र के किनारे एक हरा-भरा जंगल विजय नगर था। विजय नगर जंगल के किनारे एक विशाल जामुन का पेड़ खड़ा था। उसकी शाखाएं समुद्र के ऊपर तक फैली हुई थीं और उस पर साल भर मीठे फल लगे रहते थे। जंगल में बहुत से जानवर रहते थे ,अलग अलग प्रकार के ,सभी मस्ती में रहते थे। कहानियां तो बहुत लेकिन बंदर और मगरमच्छ की ख़ास है ,विजय नगर जंगल मानो उनके लिए ही बना हो।

बंदर और मगरमच्छ का दृश्य
उसी जामुन के पेड़ पर एक चतुर बंदर रहता था। वह ही ज्यादातर उछल कुद करता रहता था। उसका नाम रक्त मुख था। वह अकेला रहता था, लेकिन उसका स्वभाव बहुत दोस्ताना था। वह दिनभर पेड़ पर उछलता-कूदता, मीठे फल खाता और समुद्र की लहरों को देखकर अपना समय बिताता। उसका ये दोस्ताना अंदाज सभी को भाता था।
दोस्ताना अंदाज
एक दिन देखते ही देखते समुद्र से एक मगरमच्छ वहा आया। उसका नाम कलिया था। बंदर ने उसे देखा तो मुस्कुराकर बोला, मित्र, तुम यहां पहली बार आए हो क्या? आओ, इन मीठे जामुनों का स्वाद लो। मगरमच्छ ने कुछ जामुन खाए। फल बहुत स्वादिष्ट थे। उसने कहा,मित्र, मैंने इतने मीठे फल पहले कभी नहीं खाए। तुम्हारा बहुत धन्यवाद।”
उस दिन के बाद बंदर और मगरमच्छ रोज़ उस पेड़ के पास मिलने लगे। बंदर उसे मीठे जामुन खिलाता और दोनों घंटों बातें करते। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी होती गई।
बंदर पेड़ पर रहता था और मगरमच्छ समुद्र में। दोनों का संसार अलग था, लेकिन उनकी दोस्ती सच्ची लगती थी। एक दिन बंदर ने मगरमच्छ से कहा, “मित्र, तुम रोज़ मेरे लिए समय निकालकर आते हो। आज ये कुछ अच्छे जामुन अपनी पत्नी के लिए भी ले जाओ।
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मन में आया कपट
मगरमच्छ फल लेकर अपने घर चला गया। उसकी पत्नी ने जब वे मीठे जामुन खाए तो वह बहुत खुश हुई। लेकिन जामुनों की मिठास चखने के बाद उसके मन में एक लालच पैदा हो गया। अब तक ऐसा कोई भाव कलिया मगरमच्छ के अंदर नहीं आया था,वो तो रोज़ आता जामुन खाकर चला जाता था। कलिया की पत्नी ने उसके अंदर कपट डाल दिया।
उसने कलिया से कहा ,जो बंदर रोज़ इतने मीठे फल खाता है, उसका हृदय कितना मीठा होगा । फिर उसने अपने पति से फिर कहा, मैं उस बंदर का हृदय खाना चाहती हू। तुम उसे किसी तरह घर लेकर आओ।”
मगरमच्छ यह सुनकर परेशान हो गया। उसने कहा, वह मेरा मित्र है।बंदर और मगरमच्छ की दोस्ती पूरे विजय नगर जंगल में प्रसिद्ध है ,उसने कभी मेरा बुरा नहीं किया। मैं उसके साथ ऐसा कैसे कर सकता हू? लेकिन उसकी पत्नी अपनी बात पर अड़ी रही।
वह बार-बार मगरमच्छ पर दबाव डालती रही। आखिर मगरमच्छ ने हार मानकर अपनी पत्नी की बात मान ली। अगले दिन वह बंदर के पास पहुंचा। उसके चेहरे पर पहले जैसी खुशी नहीं थी। बंदर ने पूछा, मित्र, आज तुम इतने उदास क्यों हो?”
लालच ने सब बिगाड़ दिया
मगरमच्छ बोला, मेरी पत्नी तुम्हें बहुत याद करती है। वह कह रही थी कि तुम हमेशा मुझे इतने स्वादिष्ट फल खिलाते हो, लेकिन कभी हमारे घर नहीं आए। आज मेरे साथ चलो। वह तुम्हारा स्वागत करना चाहती है।”
बंदर ने समुद्र की ओर देखा। उसने कहा,लेकिन मित्र, मैं तैरना नहीं जानता। मैं तुम्हारे घर कैसे पहुंचूंगा ,मगरमच्छ बोला, तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ। मैं तुम्हें सुरक्षित अपने घर ले जाऊंगा।
बंदर और मगरमच्छ पर पूरा भरोसा था। इसलिए वह खुशी खुशी उसकी पीठ पर बैठ गया। मगरमच्छ धीरे-धीरे समुद्र के अंदर जाने लगा। शुरुआत में सब ठीक था। बंदर समुद्र की लहरें देखकर खुश हो रहा था।
लेकिन कुछ दूर जाने के बाद बंदर और मगरमच्छ अचानक चुप हो गया। बंदर ने पूछा, मित्र, तुम इतने शांत क्यों हो?” मगरमच्छ कुछ देर चुप रहा। फिर उसने भारी आवाज़ में कहा, रक्त मुख, मुझे तुम्हें एक बात बतानी है।” बंदर ने पूछा, क्या बात है?”
कलिया मगरमच्छ बोला, मुझे तुम्हारे साथ धोखा करना पड़ रहा है। मेरी पत्नी तुम्हारा हृदय खाना चाहती है। मैं तुम्हें उसी के लिए अपने घर ले जा रहा हू।”
बंदर के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई। वह समझ गया कि वह बहुत बड़े संकट में फस चुका है। लेकिन वह घबराया नहीं। उसने तुरंत सोचना शुरू किया। उसे पता था कि अगर उसने डर दिखाया तो मगरमच्छ उसे समुद्र में डुबो सकता है।
लगाया दिमाग
बंदर ने कुछ तरकीब लगाने लगा ,उसे पता था कुछ नहीं किया तो ये मुझे खा सकता है ,कुछ क्षण सोचने के बाद बंदर ने सामान्य आवाज़ में कहा, अरे मित्र तुमने यह बात पहले क्यों नहीं बताई?”
मगरमच्छ चौंक गया। क्यों?बंदर बोला, मैं अपना हृदय तो पेड़ पर ही छोड़ आया हू ” मगरमच्छ को बंदर की बात समझ नहीं आई। उसने पूछा, कोई अपना हृदय शरीर से अलग कैसे रख सकता है?”
बंदर तुरंत बोला, हम बंदरों की यही विशेषता है। हम अपना हृदय सुरक्षित स्थान पर रखते हैं। अगर तुमने पहले बताया होता तो मैं अपना हृदय साथ ले आता। अब तुम मुझे वापस पेड़ के पास ले चलो, मैं अपना हृदय लेकर तुम्हारे घर चलूंगा।
मगरमच्छ कालिया ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया। वह बंदर को लेकर वापस उसी पेड़ की ओर तैरने लगा। जैसे ही वे किनारे के पास आया, बंदर तेजी से मगरमच्छ की पीठ से कूदा और पेड़ की एक मजबूत शाखा पर चढ़ गया।
वह ऊपर बैठकर गहरी सांस लेने लगा। मगरमच्छ नीचे खड़ा उसे देखता रहा। कुछ देर बाद बंदर बोला, मित्र, तुमने मुझे धोखा दिया। अब मैं तुम्हारे साथ दोबारा कभी नहीं जाऊंगा। मगरमच्छ कालिया को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कहा,
रक्त मुख, मुझे माफ़ कर दो। मैं लालच और पत्नी के दबाव में आ गया था। बंदर ने उत्तर दिया, गलती केवल यह नहीं थी कि तुम मुझे अपने घर ले जाना चाहते थे। असली गलती यह थी कि तुमने दोस्ती पर लालच को प्राथमिकता दी। मगरमच्छ चुप रहा। बंदर ने आगे कहा,हमारी बंदर और मगरमच्छ दोस्ती पूरे जंगल में सब जानते है।
जिस दोस्त ने तुम्हें बिना किसी स्वार्थ के फल दिए, उसी के साथ तुमने छल करने की कोशिश की। दोस्ती विश्वास से बनती है और विश्वास एक बार टूट जाए तो उसे वापस पाना बहुत कठिन होता है।”
मगरमच्छ के पास कोई उत्तर नहीं था। वह धीरे-धीरे समुद्र की ओर लौट गया। बंदर फिर अपने पेड़ पर रहने लगा, लेकिन अब वह किसी भी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करता सकता था।
कहानी की सीख – Moral
इस बंदर और मगरमच्छ कहानी की सबसे बड़ी बात यह थी, कि संकट के समय में सतर्क रहे। जैसे बंदर ने अपनी बुद्धि नहीं खोई। वह घबराया जरूर, लेकिन उसने परिस्थिति को समझकर तुरंत उपाय खोज लिया।
बंदर और मगरमच्छ पंचतंत्र के मूल पाठ का आरंभ भी इसी विचार से होता है कि जिसकी बुद्धि संकट में नष्ट नहीं होती, वह कठिन परिस्थिति से निकल सकता है जैसे पानी में फंसा बंदर।
संकट कितना भी बड़ा हो, घबराने के बजाय शांत दिमाग से सोचना चाहिए। साथ ही, लालच के कारण सच्चे मित्र के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए।
हमे जीवन में भी कदम कदम पर समझना होगा,ही कौन आपक सच्चा दोस्त है,और कौन रक्त मुख बंदर और मगरमच्छ कालिया है।ऐसे लोगों से सतर्क रहे और उनसे सावधान रहे।
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धन्यवाद,
जय हिंद



