Panchatantra Story in Hindi: कौआ और लोमड़ी की सीख देने वाली कहानी

झूठी तारीफ़ का जाल
कहानियां तो हम सब पढ़ते है बड़े प्यार से ,कहानियों में खो जाना ये होता है एक जुनून,आज एक ऐसी ही कहानी लेकर आया हु।
कौआ और लोमड़ी आप सबके लिए यह सफर मज़ेदार होने वाला है, चलिए शुरू करते है,हुआ क्या कि एक घने जंगल में चार दोस्त रहते थे जिनका नाम कौआ कालू, चालाक लोमड़ी लाली, बुद्धिमान कछुआ काशी, और चंचल गिलहरी प्यारी सी गुड़िया।
कालू थोड़ा मस्तीख़ोर था कालू को अपनी आवाज़ और उड़ने की कला पर बहुत घमंड होता था। एक दिन उसे विजय नगर गांव से एक ताज़ी रोटी का बड़ा टुकड़ा मिला। वह खुशी-खुशी पेड़ की सबसे ऊंचे डाल पर बैठ गया।
उसी समय नीचे से गुजर रही लाली लोमड़ी की नज़र कालू और रोटी पर पड़ गई। उसने सोचा, “सीधे सीधे मांगूंगी तो कौआ कालू नहीं देगा, इसे तारीफ़ के जाल में उलझाना होगा।”
लाली लोमड़ी मुस्कुराकर बोली, “वाह कालू भाई! तुम्हारे जैसे सुंदर पंख और इतनी मीठी आवाज़ पूरे जंगल में आजतक किसी की नहीं है।”
कालू गर्व से फूल गया। उनकी बातें काशी सुन रहा था उसने ,उसी समय कछुआ काशी बोला, “कालू, लाली कि मीठी बातों में मत आना। चालाक लोग पहले तारीफ़ करते हैं, फिर उसका फायदा उठाते हैं।
लेकिन कालू ने काशी की बात अनसुनी कर दी। लोमड़ी लाली फिर बोली,“बस एक गीत सुना दो, आज मेरा दिन बन जाएगा।”कालू मन ही मन बहुत खुश को गया।सोचा इतना बोल रही है ,एक गाना सुना देता हूं।
कालू ने जैसे ही मुंह से “कांव” कहा, रोटी उसके मुंह से नीचे गिर गई।
लाली झट से रोटी उठाकर भाग गई। कालू हैरान रह गया और उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कहा ये लाली रुक लेकिन लाली रुकी नहीं ,चली गई,अब उसे लगा कछुए महाराज सही कह रहा था।
बुद्धि की जीत
रोटी खोने के बाद कालू बहुत दुखी था। गिलहरी गुड़िया और कछुआ काशी ने फिर उसे समझाया और उसके बाद कौआ और लोमड़ी की कहानी में नया मोड़ आया।
काशी बोला, “गलती सबसे होती है, लेकिन समझदार वही है जो उससे सीख ले और जीवन में आगे बढ़ते रहे।
कुछ दिनों बाद लाली लोमड़ी फिर जंगल में आई। इस बार उसके हाथ में कुछ भी नहीं था और उसे बहुत जोर से भूख लगी थी।
अब कालू को लग इससे बदला लेना चाहिए,कालू ने एक योजना बनाई। उसे फिर से उसे रोटी मिली और वह उसी पेड़ पर बैठ गया। जिस पेड़ पड़ बैठा था।
चालाकी हमेशा काम नहीं आती
लोमड़ी मुस्कुराई,उसने आज फिर से इसे बेवकूफ बनाया जाए और कहा “कालू भाई, आज फिर एक प्यारा गीत सुनाओ।”
कालू जोर से हंस और बोला, “इस बार मैं पहले रोटी सुरक्षित रखूंगा, फिर गाऊंगा।”
उसने रोटी एक छोटी डाल की दरार में लगा दी। अब चाहे वह बोले, रोटी नहीं गिरेगी।
लोमड़ी इंतज़ार करती रही, लेकिन उसे कुछ नहीं मिला।
प्यारी गिलहरी गुड़िया हँसते हुए बोली, “चालाकी हमेशा काम नहीं आती और सब मिलकर हंसने लगे।
लोमड़ी लाली शर्मिंदा होकर जंगल से चली गई। कालू ने अपनी गलती से सीख ली और अब कभी भी झूठी प्रशंसा पर भरोसा नहीं किया।
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“Moral of the story”
कौआ और लोमड़ी कहानी से सीख
इस कौआ और लोमड़ी की कहानी
से हमेशा सीखना चाहिए,बुद्धि और सावधानी, झूठी तारीफ़ और चालाकी से हमेशा बड़ी होती है।
जीवन में कौआ और लोमड़ी जैसे लोग मिलेंगे वहां भी हमे ध्यान रखा न चाहिए कि ,कौन अपने साथ है या कौन बस दिखावा कर रहा हैं, दिखावा कर रहा है तो कारण जाने उसके बाद इसे वैसे ही जवाब दे जैसा उसे पसंद है। क्योंकि जीवन कभी भी किसी के साथ में ऐसा हो सकता है।
ऐसी ही कौआ और लोमड़ी की कहानी देखने और पढ़ने के लिए Youtube channel @Storiesbygulabgautam और पेज https://hindistories24.com/ को भी सेव करके रखे।
धन्यवाद, जय हिंद



