दो बिल्लियाँ और चालाक बंदर की कहानी | Panchatantra Story in Hindi | लालच और झगड़े की सीख
परिचय
नमस्कार दोस्तों! आपका स्वागत है। www.HindiStories24.com पर। मैं गुलाब कुमार,लेखक (Author) हम आपके लिए लाते हैं ऐसी सच्ची, प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ, जो सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि ज़िंदगी में कुछ अच्छा सीखने के लिए होती हैं।
आज की कहानी भी बिल्कुल ऐसी ही है ,सफलता, संघर्ष और जीवन की एक बड़ी सीख से भरी हुई। इसे आसान और अपनेपन वाली भाषा में लिखा गया है, ताकि पढ़ते-पढ़ते लगे जैसे कोई अपना किस्सा सुना रहा हो। तो चलिए, शुरू करते हैं आज की शानदार कहानी।
दो बिल्लियाँ और चालाक बंदर की कहानी दृश्य

बहुत समय पहले एक हरे-भरे विजय नगर जंगल के किनारे बसे छोटे से मामनौली गांव में दो बिल्लियां रहती थीं। पहली बिल्ली का नाम मिनी था और दूसरी का नाम चिंकी। यूं तो वहाँ पर और भी बहुत से जानवर रहते थे,लेकिन इन दोनों की बात कुछ ख़ास थी,दोनों बचपन से अच्छी मित्र थीं। वे साथ साथ खेलती , साथ घूमतीं और साथ मिलकर भोजन की तलाश करती। पूरे जंगल में मिनी और चिंकि की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी।
एक दिन सुबह- सुबह दोनों भोजन की तलाश में मामनौली गांव की ओर निकलीं। पूरे दिन इधर-उधर घूमने के बाद भी उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिला। भूख से दोनों का बुरा हाल था।
तभी उन्हें रास्ते में एक ताजा और गोल रोटी दिखाई दी। दोनों एक साथ रोटी की तरफ दौड़ी और एक ही समय पर उसे पकड़ लिया। मिनी बोली, रोटी मैंने पहले देखी थी, इसलिए यह मेरी है।
चिंकी तुरंत बोली, नहीं, मैंने पहले उठाई थी। इस पर मेरा अधिकार है।इसे मैं ही खाऊंगी ,चाहे जो हो जाए वो घूरकर देखने लगे एक दूसरे को।
कुछ ही देर में दोनों बात करते करते, ज़ोरदार बहस शुरू हो गई। बहस इतनी बढ़ी कि दोनों एक-दूसरे से नाराज़ हो गईं।यही से शुरू हुआ कहानी का क्लाइमेक्स।
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चालाक बंदर की दास्तान
पास के पेड़ पर बैठा एक चालाक बंदर यह सब देख रहा था। उसका नाम मदन चालू था। वह बहुत चतुर था और हमेशा दूसरों के झगड़े का फायदा उठाने की कोशिश में रहता था।

दो बिल्लियाँ और चालाक बंदर की कहानी का दृश्य
ये सब देखकर बंदर नीचे आया और मुस्कुराकर बोला, अरे बहनों, इतनी छोटी-सी बात पर क्यों लड़ रही हो? मैं जंगल का सबसे न्यायप्रिय जानवर मदन चालू हो । मैं रोटी बराबर बांट देता हू।कुछ देर सोचने के बाद मिनी और चिकी ने सोचा कि बंदर मदन चालू सचमुच उनकी मदद करेगा। उन्होंने रोटी उसे दे दी।
बंदर मदन चालू पास के पेड़ से एक पुराना तराज़ू ले आया। उसने रोटी के दो टुकड़े किए और दोनों पलड़ों में रख दिए।
रोटी का बंटवारा
यही से शुरू हुआ मदन चालू का खेल,एक टुकड़ा थोड़ा बड़ा था और दूसरा थोड़ा छोटा। बंदर बोला, अरे! बराबर नहीं हुआ। उसने बड़े टुकड़े से थोड़ा-सा हिस्सा तोड़कर खा लिया। अब दूसरा टुकड़ा बड़ा हो गया।
बंदर फिर बोला, अरे, अब यह बड़ा हो गया। उसने दूसरे टुकड़े से भी थोड़ा हिस्सा खा लिया। दोनों मिनी और चिकी देखती रहीं। उन्हें लगा कि बंदर सच में बराबरी कर रहा है।
लेकिन हर बार बंदर मदन चालू बराबरी के नाम पर थोड़ा-थोड़ा रोटी खुद खाता जाता था। धीरे-धीरे दोनों टुकड़े बहुत छोटे रह गए।
मिनी घबराकर बोली, अब रहने दो, हमें जो बचा है वही दे दो। बंदर हँसते हुए बोला, इतनी मेहनत की है, उसकी मजदूरी तो मिलेगी।
यह कहकर उसने बचे हुए दोनों टुकड़े भी खा लिए। अब बिल्लियों के पास कुछ भी नहीं बचा। दोनों एक-दूसरे का चेहरा देखने लगीं। उन्हें समझ आ गया कि उनके झगड़े का फायदा बंदर ने उठा लिया।
अब रोये क्या फायद
मिनी की आँखों में आंसू आ गए। उसने कहा, अगर हम आपस में नहीं लड़ते, तो दोनों आधी-आधी रोटी खा सकती थीं। चिंकी ने सिर झुकाकर कहा, हमारी लालच और जिद ने हमें भूखा छोड़ दिया।
दोनों ने वहीं फैसला किया कि अब कभी किसी छोटी बात पर आपस में झगड़ा नहीं करेंगी।
अपनी गलती याद आयी
अगले दिन दोनों बिल्ली बहुत उदास थीं। उन्होंने पूरे जंगल में घूमकर भोजन ढूंढा , लेकिन कुछ नहीं मिला। भूख के कारण उन्हें अपनी गलती बार-बार याद आ रही थी।
तभी रास्ते में उन्हें एक बूढ़ा उल्लू मिला। उसने पूछा, “तुम दोनों इतनी परेशान क्यों हो? मिनी ने पूरी घटना बता दी।
उल्लू मुस्कुराया और बोला, तुम्हें बंदर ने नहीं, तुम्हारी आपसी लड़ाई ने हराया है। जब दो लोग आपस में झगड़ते हैं, तो कोई तीसरा उसका फायदा उठा लेता है। दोनों बिल्लियों को अपनी गलती का एहसास हुआ।
कुछ दिनों बाद फिर उन्हें एक बड़ी रोटी मिली। इस बार दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा और मुस्कुरा दीं। चिंकी बोली, इस बार हम बराबर बांटेंगे।
मिनी ने रोटी को दो बराबर हिस्सों में बांटा और दोनों ने मिलकर खुशी-खुशी खा लिया।
उसी समय पेड़ पर बैठा वही बंदर मदन चालू उन्हें देख रहा था। वह नीचे आया और बोला, क्या इस बार मेरी मदद नहीं चाहिए? मिनी हंसकर बोली, अब हमें किसी तीसरे की ज़रूरत नहीं है। चिंकी ने कहा, “हमने सीख लिया है कि मिल- बाँटकर खाने में ही खुशी है।”
बंदर निराश होकर वापस पेड़ पर चढ़ गया। उसे समझ आ गया कि अब उसकी चालाकी काम नहीं करेगी। उस दिन के बाद दोनों बिल्ली मिनी और चिकी पहले से भी अच्छी दोस्त बन गईं। वे जंगल के दूसरे जानवरों को भी यही सलाह देने लगीं कि छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा मत करो, वरना कोई और उसका फायदा उठा लेगा।
धीरे-धीरे यह कहानी पूरे जंगल में फैल गई। जब भी दो जानवर किसी बात पर लड़ने लगते, सब उन्हें दो बिल्लियों और चालाक बंदर की कहानी याद दिलाते।
कहानी की सीख (Moral)
दो बिल्लियाँ और चालाक बंदर की कहानी हमें यही सिखाती है, की हम जब अपने को छोड़कर दूसरों पर भरोसे करता है ,उसे हमेशा निराशा ही हाथ लगती है।इसीलिए लाइफ़ में कभी भी ऐसी परिस्थिति आये तो हमें सोचना चाहिए। उसका साथ दे या चले जाये।
सदैव याद रखे अपनी बुद्धि भ्रष्ट न करें। दो बिल्लियाँ और चालाक बंदर की कहानी हमें यही बताई है ।अपना तीर कमान किसी और को नहीं देना चाहिए।कौन कब उसे कहा इस्तेमाल करेगा नहीं पता है।अपने झगड़े के बीच में दूसरों की न सुने।
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धन्यवाद, जय हिंद



