बुद्धिमान कौआ और सांप घमंडी की कहानी | Panchatantra Story in Hindi | बुद्धि की जीत
कहानी का परिचय
नमस्कार पाठकों मै गुलाबकुमार आप सभी का स्वागत करता हूं,आपके अपने प्रिय पेज हिंदीस्टोरीज़24.कॉम पर, आपक कभी सोचो जीवन में अगर कहानी न हो तो जीवन कितना बोरिंग हो जाएगा। इसीलिए कहानी का होना अपने जीवन में सबको साथ लाता है, चाहे बचपन हो या बुढ़ापा। कौआ और सांप “यह कहानी भी बस मनोरंजन के लिए है” बस यही से शुरुवात करते है , बहुत समय पहले एक घने और सुंदर जंगल के किनारे एक विशाल बरगद का पेड़ था। उसकी शाखाएँ इतनी फैली हुई थीं कि दोपहर के समय भी उसके नीचे ठंडी छाया बनी रहती थी। उसी बरगद के पेड़ पर एक कौआ और उसकी पत्नी कौवी अपना छोटा-सा घोंसला बनाकर रहते थे।

कौआ और सांप का दृश्य
कौआ बहुत समझदार था। वह दूर-दूर तक उड़कर भोजन की तलाश करता और शाम होते ही अपने घोंसले में लौट आता। दोनों पति-पत्नी अपने जीवन से बहुत खुश थे। कुछ ही समय बाद कौवी ने अंडे दिए। दोनों अपने आने वाले बच्चों को लेकर बहुत उत्साहित थे।
लेकिन उनके सुख के बीच एक बड़ी परेशानी छिपी हुई थी। बरगद के पेड़ के ठीक नीचे एक पुराना और गहरा बिल था। उस बिल में एक कलिया सांप रहता था। लकलिया सांप बहुत घमंडी ,क्रूर और निर्दयी था। जब भी उसे भूख लगती, वह पेड़ पर चढ़ जाता और घोंसलों में रहने वाले छोटे पक्षियों के अंडे या बच्चे खा जाता।
कौए ने कई बार सांप को ऐसा करते देखा था। वह समझ गया था कि उसका परिवार भी अब सुरक्षित नहीं है।
एक दिन कौआ भोजन की तलाश में गया हुआ था। उसके पीछे से सांप धीरे-धीरे पेड़ पर चढ़ा और कौए-कौवी के घोंसले तक जा पहुंचा। उसने घोंसले में रखे सारे अंडे खा लिए और वापस अपने बिल में चला गया।
शाम को कौआ लौटा तो कौवी फूट-फूटकर रो रही थी। कौए ने पूछा, क्या हुआ? कौवी ने रोते हुए कहा, “हमारे सारे अंडे कलिया खा गया।”
कौआ बहुत दुखी हुआ, लेकिन उसने गुस्से में कोई जल्द बाज़ी नहीं की। उसने कहा, हम रोकर अपनी समस्या हल नहीं कर सकते। हमें कोई ऐसा रास्ता खोजना होगा जिससे कलिया सांप को हमेशा के लिए यहां से जाना पड़े। फिर हम आराम से रहा सकते है।
ताकत से बड़ी चीज़ बुद्धि
कौवी बोली, लेकिन वह हमसे बहुत ताकतवर है। हम उससे लड़ नहीं सकते।”कौआ बोला, ताकत से बड़ी चीज़ बुद्धि होती है। हमें किसी बुद्धिमान मित्र से सलाह लेनी चाहिए। अगली सुबह दोनों जंगल के एक शांत हिस्से में रहने वाली अपनी पुरानी मित्र लोमड़ी के पास गए। लोमड़ी अपनी चतुराई के लिए पूरे जंगल में प्रसिद्ध थी। लोमड़ी के पास ऐसी ऐसी तरकीब होती की अच्छे अच्छे लोग बिखर जाते थे।
बुद्धिमान कौए ने उसे पूरी बात बताई। लोमड़ी ने कुछ देर सोचा और बोली, सांप से सीधे लड़ना मूर्खता होगी। उसे उसकी ताकत से नहीं, उसकी आदत और लालच से हराना होगा।
लोमड़ी की तरकीब
कौवी ने पूछा, लेकिन कैसे? लोमड़ी ने कहा, पास के महल में रोज़ सुबह राजपरिवार के लोग नदी में स्नान करने आते हैं। उनके साथ सैनिक भी रहते हैं। राजकुमारी स्नान करते समय अपने गहने किनारे पर रखती है। यदि तुम उनमें से कोई चमकदार गहना उठाकर सांप के बिल के पास डाल दो, तो सैनिक उसे खोजते हुए वहां आ सकते हैं।
कौआ ध्यान से सुनता रहा। लोमड़ी ने आगे कहा, लेकिन याद रखना, तुम्हें गहना लेकर सीधे सांप के बिल में नहीं जाना है। उसे ऐसी जगह गिराना है जहाँ से सैनिक साफ़ देख सकें और निश्चित कर सके।
कौए ने हा में सिर हिलाया। अगली सुबह कौआ नदी के पास एक पेड़ पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद राज परिवार जा पहुंचा। सैनिक चारों ओर पहरा देने लगे और राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ नदी में उतर गई।
किनारे पर उसके सुंदर हार और दूसरे आभूषण रखे थे। कौआ सही समय का इंतजार करने लगा। जैसे ही सैनिक दूसरी ओर देखने लगे, कौआ नीचे झपटा और राजकुमारी का एक चमकदार हार अपनी चोंच में उठा लिया।

कौआ और सांप का दृश्य
सैनिकों ने उसे देख लिया। एक सैनिक ने जोर से चिल्लाया अरे अरे वो देखो कौआ हार लेकर उड़ गया! एक और सैनिक ने चिल्लाया। कई सैनिक कौए के पीछे दौड़ पड़े। कौआ जानबूझकर बहुत तेज़ नहीं उड़ रहा था। वह सैनिकों को अपने पीछे बनाए रखते हुए जंगल की ओर बढ़ा। सैनिक सोच रहे थे कि वे थोड़ी ही देर में उसे पकड़ लेंगे।
जैसे उन्होंने ने प्लान बनाया था, कौआ सीधे अपने पेड़ पर नहीं गया। वह सांप के बिल की ओर उड़ने लगा।सांप उस समय अपने बिल के बाहर धूप सेंक रहा था। कौए ने उसे देखा और हार को बिल के ठीक पास गिरा दिया। हार ज़मीन पर चमकने लगा।
सैनिक दौड़ते हुए वहां जा पहुंचे जहां हार गिरा था। एक सैनिक ने कहा, “यह रहा हार!” लेकिन तभी उसकी नजर सांप पर पड़ी।
सांप फुंफकारता हुआ हार के पास कुंडली मारकर बैठा था। सैनिकों को लगा कि सांप ने हार छिपाने के लिए उसे अपने बिल के पास रखा है। सारे सैनिकों ने तुरंत लाठी उठाई और पीटने लगे।

कौआ और सांप और सोने के हार का दृश्य
सांप भाग गया
सांप ने बचने की कोशिश की, लेकिन सैनिकों ने उसे वहा से भगा दिया। वह डरकर जंगल के बहुत दूर हिस्से में चला गया। सैनिक हार लेकर वापस महल की ओर लौट गए। ऊपर पेड़ की शाखा पर बैठा कौआ और कौवी सब कुछ देख रहे थे।
कौवी की आँखों में खुशी के आंसू आ गए। उसने कहा, आज हमारी जान और हमारा घर दोनों बच गए। कौआ मुस्कुराया, लेकिन उसने कहा, अभी हमें सावधान रहना होगा। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि खतरा हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। हमें अपने नए बच्चों के लिए सुरक्षित जगह भी तैयार करनी चाहिए।
दोनों ने बरगद की एक ऊंची और मजबूत शाखा पर नया घोंसला बनाया। इस बार उन्होंने ऐसी जगह चुनी जहाँ नीचे से किसी सांप के लिए आना बहुत मुश्किल था। कुछ दिनों बाद कौवी ने फिर अंडे दिए।
इस बार दोनों बहुत सावधान थे। वे बारी-बारी से घोंसले की रखवाली करते। कौआ आसपास के पेड़ों पर भी नजर रखता और कौवी बच्चों को गर्म रखती। समय बीतता गया और अंडों से छोटे-छोटे बच्चे बाहर आए।
दूसरे पक्षी सलाह लेने लगे
कौआ और कौवी उन्हें देखकर बहुत खुश हुए। एक दिन जंगल के दूसरे पक्षी उनके पास आए और बोले, हमें बताओ, तुमने इतने शक्तिशाली सांप को कैसे हराया? कौआ बोला, हमने उसे अपनी ताकत से नहीं हराया। हमने उसकी ताकत को समझा और अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया। एक बूढ़ी मैना ने कहा, तो क्या हमें हर समस्या में किसी और की मदद लेनी चाहिए?
कौआ मुस्कुराया और बोला, मदद लेना कमजोरी नहीं है। जब समस्या बड़ी हो, तो सही सलाह लेना समझदारी है। लेकिन सलाह के बाद सही समय पर सही निर्णय लेना भी उतना ही जरूरी है। कौवी ने कहा, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गुस्से में कभी फैसला नहीं करना चाहिए।”
सभी पक्षियों ने उसकी बात ध्यान से सुनी। कुछ समय बाद जंगल में यह कहानी प्रसिद्ध हो गई। अब जब भी कोई छोटा पक्षी किसी बड़ी परेशानी में फंसता, वह कौए के पास सलाह लेने आता।
कौआ हर किसी से यही कहता, “दुश्मन कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, यदि हम घबराने के बजाय शांत दिमाग से सोचें, तो समाधान जरूर मिल सकता है।”
इस घटना के बाद जंगल के पक्षियों ने एक और बात सीखी,बुद्धि केवल चाल चलने का नाम नहीं है। बुद्धि का असली अर्थ है सही समय पर सही निर्णय लेना और उस निर्णय से किसी निर्दोष को नुकसान न देना। सबको साथ लेकर चलना।
कौआ और कौवी अपने बच्चों के साथ बरगद के पेड़ पर खुशी से रहने लगे। अब उन्हें किसी सांप का डर नहीं था। और वो दिन है और आज का दिन है ,उस दिन से जंगल में एक कहावत मशहूर हो ग
“कौआ और सांप यह कहानी बताती है,जहाँ बल की सीमा समाप्त हो जाती है, वहा बुद्धि रास्ता खुलता है।”
कहानी की सीख(Moral)
कौआ और सांप से सिखने को मिलता है,की जीवन में बड़ी से बड़ी समस्या का सामना केवल ताकत से नहीं किया जा सकता। कुछ समस्याएं शांत दिमाग, सही सलाह, धैर्य और बुद्धिमानी से कठिन परिस्थिति का समाधान निकाला जा सकता है। गुस्से में लिया गया फैसला नुकसान कर सकता है, जबकि सोच-समझकर लिया गया निर्णय सफलता दिला सकता है।
कभी कभी दूसरों की मदद लेनी चाहिए,जब आपको पता है आसे नहीं होगा,मदद कई रूप में हो सकती है,जैसे सलाह, आर्थिक, शारीरिक इत्यादि।इसमें कोई हर्ज नहीं है ,लेकिन आप गलत न हो बस।जैस इस कौआ और सांप के बीच में हुआ।
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धन्यवाद, जय हिंद



