कौआ और घमंडी मोर की कहानी | Crow and Proud Peacock Story in Hindi

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कौआ और घमंडी मोर: एक  बाल कहानी

 

परिचय

कौआ और घमंडी मोर की यह कहानी  बच्चों और बड़ों दोनों के लिए एक बेहद प्रेरणादायक बच्चों वाली कहानी है। यह कहानी हमें सिखाती है कि बाहरी सुंदरता या रूप-रंग कुछ समय के लिए ही आकर्षित कर सकता है, लेकिन इंसान की असली पहचान और मूल्य उसके अच्छे व्यवहार और संकट में काम आने वाले गुणों से ही तय होता है। जब अहंकार इंसान की बुद्धि पर हावी हो जाता है, तो समय उसे कैसे सीख सिखाता है और सच्चे मित्र की क्या पहचान होती है,आइए इस रोचक और शिक्षाप्रद कहानी के माध्यम से जानते हैं।

​बहुत समय पहले की बात है, एक घने और हरे-भरे जंगल के पास एक सुंदर तालाब था। सुबह की पहली किरण के साथ ही वहां अनेक प्रकार के पक्षियों का चहकना शुरू हो जाता था।

​इसी जंगल में एक मोर भी रहता था। उसकी सुंदरता का कोई सानी नहीं था। जब भी वह अपने पंख फैलाकर ताल मिलाता, तो लगता मानो जंगल में रंगों की बारिश हो रही हो। जंगल के अन्य पक्षी अक्सर उसकी सुंदरता देखकर दंग रह जाते और उसकी तारीफों के पुल बांधते नहीं थकते।

​तारीफ़ सुन-सुनकर मोर के मन में अहंकार का बीज पनप गया। धीरे-धीरे उसे लगने लगा कि वही इस जंगल का सबसे श्रेष्ठ पक्षी है और बाकी सभी उसके सामने तुच्छ हैं।

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कौआ और घमंडी मोर की कहानी का दृश्य

​जब मोर की मुलाकात कौए से हुई

​एक दिन मोर तालाब किनारे शान से टहल रहा था। तभी एक साधारण-सा कौआ उड़कर पास की डाल पर आ बैठा।

​कौए ने शिष्टाचार दिखाते हुए कहा, “मित्र आज तो तुम्हारे पंख धूप में और भी ज़्यादा चमक रही हैं।”

​मोर ने घमंड से अपनी गर्दन और ऊँची की और बोला, “मैं तो हमेशा ही सुंदर लगता हु आज नया क्या है , लेकिन ज़रा अपने काले और भद्दे पंखों को देखो… तुम मेरे सामने कितने साधारण और बदसूरत लगते हो।”

​कौए ने बिना बुरा माने मुस्कुराकर जवाब दिया, “मित्र, प्रकृति ने हर किसी को अलग बनाया है। रूप से ज़्यादा इंसान या पक्षी के गुण मायने रखते हैं।”

​मोर हंसते हुए बोला, “यह तो बस दिल बहलाने की बातें हैं! असली पहचान तो ख़ूबसूरती से ही होती है।” ​कौआ शांत रहा और वहां से उड़ गया।

​संकट में जंगल और कौए की बुद्धिमत्ता

​कुछ दिनों बाद जंगल में मूसलाधार बारिश हुई। तालाब उफान पर आ गया और पहाड़ी के पास से आने वाले पानी का रास्ता भारी पत्थरों, मिट्टी और लकड़ियों से बंद हो गया। यदि यह रास्ता तुरंत साफ़ न होता, तो जंगल के कई जानवरों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता।

​सभी जानवर इकट्ठा हुए। हाथी ने भारी लकड़िया हटाने का जिम्मा लिया और बंदरों ने छोटी छोटी टहनी हटानी शुरू की, कौआ आसमान पर उड़कर स्थिति का जायजा ले रहा था। अपनी तीव्र दृष्टि से उसने वह मुख्य जगह को ढूंढ निकाली जहां मिट्टी जमा होकर पानी रोक रही थी। उसने तुरंत नीचे आकर जानवरों को सही जगह का मार्गदर्शन किया, जिससे काम आसान हो गया।

​तभी मोर भी वहा पहुंचा,बंदर ने उससे मदद मांगी, तो मोर अपने पंख बचाते हुए पीछे हट गया और बोला, “मैं इतने कीचड़ में काम नहीं कर सकता, मेरे सुंदर पंख गंदे हो जाएँगे। मैं दूर खड़े होकर तुम सबका हौसला बढ़ाता हूं”

​कौए और बाकी जानवरों ने कुछ नहीं कहा और मिलकर पानी का रास्ता साफ़ कर दिया।

​जब रूप नहीं, गुण काम आए

​अगले ही दिन जंगल में एक भयानक आंधी आई ,जंगल में ये सब आम बात होती है,लेकिन उस दिन तेज़ हवाओं के कारण पेड़ों की भारी शाखाएँ टूटने लगीं। मोर तालाब किनारे झाड़ियों के पास छुपा हुआ था कि अचानक एक बड़ी डाल उस पर आ गिरी।

​मोर की लंबी और भारी पूंछ सूखी बेलों और काँटो में बुरी तरह उलझ गई। वह जितना निकलने की कोशिश करता, उतना ही उलझता जा रहा था। घबराकर वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ! कोई मेरी मदद करो!”

​उसकी आवाज़ सुनकर कौआ तुरंत आया। स्थिति समझते ही उसने अन्य पक्षियों को आवाज़ दी। कौए की अगुआई में कई पक्षियों ने अपनी चोंच से बेलों को काटना शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद मोर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

​अहंकार का अंत

​अपनी जान बचने के बाद मोर की आँखो में पछतावे के अश्रु थे। उसने शर्मिंदा होकर कौए से कहा, “मित्र! मैंने तुम्हारे रंग और रूप का मज़ाक उड़ाया था, फिर भी तुमने मेरी जान बचाई। आज मुझे समझ आ गया कि बाहरी सुंदरता कुछ समय के लिए आकर्षित कर सकती है, लेकिन कठिन समय में हमारे काम केवल अच्छे गुण और दूसरों की मदद करने की भावना ही आती है।”

​कौए ने मोर के कंधे पर थपकी देते हुए कहा, “सच्ची सुंदरता हमारे व्यवहार में होती है, रूप में नहीं।”

​उस दिन के बाद से मोर का घमंड पूरी तरह खत्म हो गया। वह अब किसी के रूप-रंग का मज़ाक नहीं उड़ाता था और जंगल के सभी जीवों का सम्मान करने लगा था।

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​कहानी से सीख (Moral of the Story)

कौआ और घमंडी मोर की कहानी से मुझे यह लगता है ,कभी घमंड नहीं करना चाहिए। क्यों की बाहरी सुंदरता स्थायी नहीं होती है।इसलिए किसी को खुद से छोटा नहीं समझना चाहिए।

कौआ और घमंडी मोर की कहानी यह भी सिखाती है। हर व्यक्ति में एक विशेष गुण होता है। किसी के रूप-रंग से उसकी क्षमता का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।

कौआ और घमंडी मोर की कहानी यह भी बताती है,की सच्ची सुंदरता गुण में हैं। संकट के समय रूप नहीं, बल्कि आपकी समझदारी और मददगार स्वभाव ही काम आता है।

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धन्यवाद, जय हिंद

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