बुद्ध और मासूम घायल कुत्ता की कहानी – “दया का फल”

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भगवान बुद्ध और मासूम घायल कुत्ते की कहानी –“दया का फल”

ये सिर्फ एक कहानी नहीं हमारे जीवन एक सच्चाई है। एक बार क्या हुआ कि, भगवान बुद्ध अपने कुछ शिष्यों के साथ विजय नगर गांव की तरफ जा रहे थे। सुबह का समय था। सूरज की हल्की किरणें पेड़ों के बीच से धरती पर पड़ रही थीं। वातावरण शांत था और पक्षियों की मधुर आवाज़ चारों ओर सुनाई दे रही थी। मानो आज ही स्वर्ग धरती पर आ गया हो।आज कुछ अनोखा होने वाला था। ऐसा लग रहा था,मानो उनके शिष्यों का जीवन में कोई बड़ा बदलाव आने वाला था ,उन शिष्यों को क्या पता था कि जीवन की एक बड़ी सीख मिलने वाली है।

भगवान बुद्ध

 

जब भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। साथ साथ वे रास्ते में लोगों को जीवन, करुणा, शांति और सत्य का संदेश देते हुए चल रहे थे।

कुछ दूर जाने के बाद अचानक उन्हें रास्ते के किनारे एक पेड़ दिखाई देता है । उस पेड़ के नीचे एक मासूम जानवर की आवाज आवाज आरही थी ,जब पास में जाकर देखा तो , घायल कुत्ता पड़ा हुआ था।

जब भगवान बुद्ध ने देखा ,उसका शरीर धूल से भरा था। उसके एक पैर में गहरी चोट लगी थी और शरीर पर कई जगह घाव थे। वह दर्द के कारण धीरे-धीरे कराह रहा था। उसकी आंखों में दर्द और असहायता साफ दिखाई दे रही थी।

बुद्ध के एक शिष्य आनंद की नजर उस कुत्ते पर पड़ी।

आनंद ने  कुत्ते को देखकर कहा, गुरुदेव, यह कुत्ता बहुत घायल है। लेकिन हमें विजय नगर गांव भी जाना है। शायद कोई और इसकी सहायता कर देगा। हमें यहां से आगे बढ़ना चाहिए।

भगवान बुद्ध कुछ क्षणों तक  उस घायल कुत्ते को देखते रहे। फिर वे बिना कुछ कहे उसके पास जाकर बैठ गए। आनंद शिष्य ने आश्चर्य से बुद्ध के  देखने लगे।

भगवान बुद्ध ने अपने कमंडल (जिसमें पानी रखते है) उसने से थोड़ा पानी निकाला और धीरे-धीरे कुत्ते को पानी पिलाया। बेचारा कुत्ता पहले डर गया, लेकिन बुद्ध के शांत चेहरे और प्रेम भरे व्यवहार को देखकर धीरे-धीरे पानी पीने लगा।

भगवान बुद्ध ने उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा,“डरो मत। अब तुम्हें अकेला नहीं रहना पड़ेगा।मैं हु तुम्हारे साथ ,सभी शिष्य चुपचाप यह सब देख रहे थे।

भगवान बुद्ध ने अपने एक शिष्य से कहा, वहा से कुछ साफ कपड़ा और औषधि ले आओ। शिष्य तुरंत सामान लेकर आया।

बुद्ध ने बड़े ध्यान से कुत्ते के घाव को साफ किया और उस पर मरहम लगाया। चोट लगने के कारण कुत्ता दर्द से थोड़ा छटपटाया, लेकिन बुद्ध ने उसे प्रेम से सहलाते हुए शांत किया।

कुछ देर बाद कुत्ते की कराह कम होने लगी। एक शिष्य ने बुद्ध से पूछा,भगवन, आपने इस पशु के लिए इतना समय क्यों दिया? हम मनुष्यों को उपदेश देने जा रहे हैं। क्या हमारा समय किसी मनुष्य की सहायता करने में अधिक उपयोगी नहीं होता? बुद्ध मुस्कुराए।

बुद्ध का संदेश

उन्होंने शिष्य की ओर देखा और शांत स्वर में कहा, तुम्हें क्या लगता है, करुणा केवल मनुष्यों के लिए होती है? शिष्य कुछ नहीं बोला।

बुद्ध ने घायल कुत्ते की ओर देखते हुए कहा,यह बोल नहीं सकता, अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता और न ही यह हमसे सहायता मांग सकता है। लेकिन क्या इसका अर्थ यह है कि इसे दर्द नहीं होता?”

शिष्य ध्यान से बुद्ध की बातें सुनने लगा। बुद्ध ने कहा,जिस प्रकार मनुष्य सुख चाहता है और दुख से बचना चाहता है, उसी प्रकार प्रत्येक जीव सुख चाहता है और पीड़ा से मुक्त होना चाहता है।”

फिर बुद्ध ने एक छोटी-सी बात कही, जिसने उनके शिष्यों को भीतर तक सोचने पर मजबूर कर दिया।

जिसे हमारी सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता हो, उसे छोड़कर आगे बढ़ जाना कैसी करुणा है?

शिष्य को अपनी बात पर पछतावा होने लगा। कुछ समय बाद घायल कुत्ता धीरे-धीरे उठने की कोशिश करने लगा। उसका पैर अभी भी कमजोर था, लेकिन अब उसके चेहरे पर पहले जैसा भय नहीं था।

वह धीरे-धीरे बुद्ध के पास आया और उनके पैरों के पास बैठ गया। बुद्ध ने उसके सिर पर हाथ रखा। कुत्ता शांत होकर बुद्ध की ओर देखने लगा।

ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आंखे बिना शब्दों के धन्यवाद कह रही हों। आनंद ने यह दृश्य देखा तो उसकी आँखें नम हो गईं। उसने बुद्ध से कहा,

भगवन, आज मुझे समझ आया कि करुणा का अर्थ केवल किसी को उपदेश देना नहीं है। करुणा का अर्थ है किसी की पीड़ा को महसूस करना और अपनी क्षमता के अनुसार उसे कम करने का प्रयास करना चाहिए।

बुद्ध मुस्कुराए और बोले, यही सच्ची करुणा है। उन्होंने आगे कहा, दया करने के लिए यह देखना आवश्यक नहीं कि सामने मनुष्य है या जानवर,जहा पीड़ा दिखाई दे, वहा करुणा का हाथ बढ़ाना चाहिए।”

शिष्य आनन्द ने पूछा,लेकिन भगवन, यदि हम हर जीव की सहायता करने लगें तो क्या हमारा मार्ग कठिन नहीं हो जाएगा? बुद्ध ने उत्तर दिया,

करुणा का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन यही मार्ग मनुष्य के हृदय को सच्चा और निर्मल बनाता है।

फिर बुद्ध और उनके शिष्य कुछ समय वहा रुके। उन्होंने आसपास के लोगों को उस घायल कुत्ते की देखभाल के बारे में बताया। विजय नगर गांव के कुछ लोगों ने भी उसकी सहायता करने का निर्णय लिया।

जब बुद्ध वहा से आगे बढ़ने लगे तो कुत्ता कुछ दूर तक उनके पीछे आने लगा। भगवान बुद्ध ने पीछे मुड़कर उसे देखा।

उन्होंने मुस्कुराकर कहा, अब तुम सुरक्षित हो। अपने रास्ते जाओ और स्वस्थ रहो। कुत्ता वहीं रुक गया।

वह कुछ देर तक भगवान बुद्ध को देखता रहा और फिर धीरे-धीरे विजय नगर गांव की ओर चला गया। बुद्ध अपने शिष्यों के साथ आगे बढ़ गए।

लेकिन उस दिन उनके शिष्यों ने केवल एक घायल कुत्ते की सहायता होते हुए नहीं देखी थी। उन्होंने करुणा का वास्तविक मतलब समझा था।

उन्होंने सीखा कि किसी की सहायता करने के लिए यह जरूरी नहीं कि वह हमारा अपना हो। कभी-कभी एक अनजान जीव भी हमारे सामने इसलिए आ जाता है क्योंकि उस समय उसे हमारी थोड़ी-सी दया और सहायता की आवश्यकता होती है।

कहानी से मिलने वाली सीख

इस कहानी की सबसे बड़ी सीख है कि सच्ची करुणा किसी भेदभाव को नहीं देखती।

हम अक्सर सोचते हैं कि हमारी जिम्मेदारी केवल अपने परिवार, दोस्तों या परिचित लोगों तक सीमित है। लेकिन दया और करुणा की कोई सीमा नहीं होती।

एक छोटा-सा पानी का गिलास किसी प्यासे जीव के लिए बहुत बड़ा उपकार हो सकता है। एक रोटी किसी भूखे जानवर के लिए जीवन का सहारा बन सकती है। और किसी घायल जीव के घाव पर लगाया गया थोड़ा-सा मरहम उसके दर्द को कम कर सकता है।

भगवान बुद्ध की यह सीख हमें याद दिलाती है कि हमारे छोटे-छोटे अच्छे कर्म भी किसी दूसरे जीव के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसलिए जब भी हमारे सामने कोई जरूरतमंद मनुष्य या पशु आए, और हम उसकी सहायता करने की स्थिति में हों, तो हमें अपनी क्षमता के अनुसार उसकी मदद जरूर करनी चाहिए।

क्योंकि दया कभी व्यर्थ नहीं जाती।आज हम जब किसी की पीड़ा को कम करते हैं, तो शायद कल किसी और के जीवन में वही करुणा हमारे लिए भी  लौटकर आ सकती है।

भगवान बुद्ध  का अंतिम संदेश

सच्ची करुणा और निष्ठा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ के हर जीव के प्रति एक जैसी ही हो।

मुझे पता है ये कहानी आपको जरूर पसंद आई होगी, भगवान बुद्ध की कहानी पसंद आई हो, तो इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ जरूर साझा करें। शायद आपकी एक छोटी-सी शेयर किसी दूसरे व्यक्ति के मन में भी करुणा और दया का भाव जगा सकती है। जीवन को सरल और वास्तविक बना सकती है।

ऐसी ही कहानियां देखने और पढ़ने के लिए Youtube channel @Storiesbygulabgautam और पेज www.Hindistories24.Com को भी सेव करके रखे

धन्यवाद, जय हिंद

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