चालाक बाघ की कहानी | पंचतंत्र की कहानी

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चालाक बाघ की कहानी और सोने की कंगन की कहानी

एक जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था। ये चालाक बाघ की कहानी उसके बारे में है, बुढ़ापे के कारण उसके हाथ पैर चल नहीं रहे थे। अपने भोजन के लिए जानवरों का शिकार करना बाघ के लिए अत्यंत कठिन हो गया था ,लेकिन जिंदा रहने के लिए उसे खाना तो खाना ही था।

चालाक बाघ की कहानी

 

बूढ़े बाघ को मिला सोने का कंगन

एक दिन वह शिकार की खोज में इधर-उधर घूम रहा था। तभी उसकी नज़र किसी चमकती हुई वस्तु पर पड़ी। बाघ ने पास जाकर देखा तो वह एक सोने का कंगन था। बाघ कंगन उठाकर सोचने लगा कि वन में इतना कीमती कंगन भला आया कहा से. अचानक उसे सामने से एक आदमी आता दिखाई दिया। चालाक बाघ की कहानी में बाघ को एक आइडिया आया । वह सामने के नदी के पास जाकर चुपचाप लेट गया।

यात्री के मन में जागा लालच

पास के गांव से आता हुआ, यात्री उस सोए हुए बाघ को देखकर घबरा उठा। तभी उसकी नज़र बाघ के पास पड़े हुए सुनहरे कंगन पर पड़ी। उसके मन में लालच आ गया और मन ही मन वह कंगन पाने की युक्ति सोचने लगा।

इधर चालाक बाघ की कहानी में बाघ ने धीरे से अपना सिर उठाया, यात्री की ओर देखा और उसके मन की बात पढ़ने लगा। दोनों की दृष्टि मिली पर चालाक बाघ ऐसा ही निराश पड़ा रहा मानो शरीर में शक्ति ही नहीं हो। उसकी बेचारी दशा को देखकर यात्री ने सोचा कि यह तो अत्यंत बुड्ढा है, और मुझ पर हमला नहीं कर पाएगा।

तभी बाघ ने आदमी जैसे आवाज में कहा, मित्र क्या सोच रहे हो ? मैं तुम्हे नहीं खाऊंगा । मेरे पास आओ।”एक बाघ को मनुष्य की तरह बोलते हुए देखकर यात्री हैरान रह गया।

बाघ ने यात्री को अपने जाल में फंसाया

डरते-डरते उसने कहा, सच पूछो, तो मैं तुम्हारे पास पड़े हुए उस सोने कंगन के बारे में सोच रहा था।” बाघ ने कहा, “अच्छा वह कंगन,वही कंगन को किसी को दान में देने की प्रतीक्षा में ही तो मैं बैठा हू।”

यात्री को घबराता देखकर बाघ ने फिर कहा, “आश्चर्यचकित मत हो ओ। मैं पहले अत्यंत खूंखार हुआ करता था। अपने मार्ग में आने वाले किसी को भी नहीं छोड़ता था। अब मैं अपने किए हुए पापों की सजा भोग रहा हू। अपने परिवार के सभी सदस्यों को एक-एक कर मैं खा चुका हू।

भाग्यवश एक संत मुझे मिले। उन्होंने मुझे यह सुनहरा कंगन देकर कहा कि इसे किसी जरूरतमंद को दान में दे देना तो तुम्हारे सारे पाप धुल जाएंगे। मैं किसी ऐसे ही व्यक्ति की प्रतीक्षा कर रहा हू, जिसे मैं यह कंगन दे सकू। मेरी समझ से तुम ही वो व्यक्ति हो। पर दान लेने से पहले तुम्हें इस नदी में स्नान करके पवित्र होना पड़ेगा।”

बाघ की बात सुनकर यात्री हक्का-बक्का रह गया। दान स्वरूप सोने का कंगन मिलना तो बड़े सौभाग्य की बात थी पर वह बाघ पर कैसे विश्वास करे? क्या भरोसा है कि बाघ सत्य ही कह रहा है? यात्री नदी में स्नान के लिए जाने में हिचकने लगा। तभी लोभ ने उसके मन में सिर उठाया। यात्री विचार करने लगा कि बाघ तो सचमुच बहुत बूढ़ा है।

सोने के कंगन के लिए नदी में उतरा यात्री

उसके दांत और नाखून भी घिस गए है । ऐसे में उससे क्या डरना,वह अवश्य ही अपने पापों को प्रायश्चित करना चाहता होगा। ऐसा विचार कर यात्री स्नान करने के लिए नदी के पास गया। पानी में अपना पैर डालते ही वह भीतर की ओर धंसने लगा। जितना वह पैर निकालने की कोशिश करता उतना ही और धंसता जाता। उसकी यह स्थिति देखकर बाघ ने आश्वासन देते हुए कहा, मित्र चिंता मत करो। ठहरो, मैं तुम्हारी मदद करता हु”

चालाक बाघ की असली चाल का खुलासा

यात्री के पास बाघ पर भरोसा करने के अतिरिक्त कोई और चारा नहीं था। उसने समझा कि बाघ आकर उसे खींचकर बाहर निकाल देगा। बाघ उठकर नदी के किनारे आया। लपककर उसने यात्री का कंधा पकड़ा और उसे बाहर खींच लिया। बाघ की पकड़ मजबूत थी। यात्री समझ गया कि अब उसका अंत निकट ही है। बाघ ने उसे मूर्ख बनाकर अपना शिकार फंसाया है। अब उसका बचना असंभव है।

बाघ ने यात्री को मारकर जी भरकर अपनी भूख मिटाई। सोने के कंगन के लालच के कारण ही उसका ये हाल हुआ।

चालाक बाघ की कहानी से मिलने वाली शिक्षा

“लालच करना एक बुरी बात है” और चालाक बाघ की कहानी हमें सिखाती ऐसे लोगों पर बिल्कुल भरोसा न करे जो पहले से आत्मघाती हो।जब भी ऐसा लगे कि लालच आ रहा है मन में हमेशा एक बार सोचें कि ये करने के बाद क्या हैं आगे जीवन में सत्य के मार्ग पर रहेंगे या असत्य के मार्ग पर।

चालाक बाघ की कहानी ये कहानी का मतलब ही है,जीवन में की कभी भी लालच नहीं करना चाहिए नहीं तो उस व्यक्ति जिस हालत हो सकता है जैसे  चालाक बाघ की कहानी में हुआ

 

ऐसी ही चालाक बाघ की कहानी और देखने और पढ़ने के लिए Youtube channel @Storiesbygulabgautam और पेज www.Hindistories24.Com को भी सेव करके रखे

धन्यवाद,

जय हिंद

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