शेर और चूहा Panchatantra Story in Hindi – सबसे छोटी मदद सबसे बड़ी
कहानियां तो हम सब पढ़ते है ,शेर और चूहा की कहानी अनोखी है।
बहुत सी कहानी है जो हमारे मन को बदल दे, अच्छा कार्य करने के लिए,ऐसी ही एक कहानी लेकर आया हु। ये शेर और चूहा की कहानी मेरे बचपन से सुनता आ रहा हु आपको भी पढ़कर मजा आएगा।

शेर और चूहा जंगल का दृश्य
शक्तिशाली सिंहराज
बहुत समय पहले की बात है,एक घने जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था। जंगल के सभी जानवर उससे डरते थे। उसका नाम था सिंहराज। सिंह राज अपनी ताकत पर बहुत घमंड हुआ करता था और वह हमेशा सोचता था, कि दुनिया में कभी कोई उसकी बराबरी नहीं कर सकता। सिंह राज बहुत घमंड भी रखता था।
मस्तीखोर चिंटू
वही दूसरी तरफ,उसी जंगल में एक छोटा-सा चूहा भी रहता था, जिसका नाम था चिंटू। चिंटू मन का मौजी और बहुत फुर्तीला और दयालु था। हमेशा जंगल में उछल कुद करते रहता और सभी जानवरों का प्यारा था।पूरा जंगल मानो उसके बिना एकदम अधूरा सा लगता था,उसकी आदत मास्करे जैसी थी,मस्ती में रहता था ।
एक दिन खेलते-खेलते चिंटू गलती से सोते हुए शेर के ऊपर चढ़ गया। सिंह राज के ऊपर चढ़कर नाच रहा था, उछल रहा था ,जहाँ एक तरफ जंगल में सभी डरते थे सिंहराज से ,वही चिंटू नाच रहा था , चिंटू को पता भी नहीं चला वह कहने उसके ऊपर चढ़ गया, चिंटू को जबतक समझ आया कि ये तो मैं खेलते खेलते सिंहराज के ऊपर चढ़ गया हु ,जैसे ही चिंटू भागने वाला था ,शेर की नींद खुल गई। उसने गुस्से में चूहे चिंटू को अपने पंजे में पकड़ लिया। और जोर से गुर्राने लगा।
जब पंजे में फंसा चूहा
सिंह राज के पंजे नुकीले थे ,और उसके जोर से पकड़ा था,चूहा डर के मारे कांपने लगा और बोला, महाराज, मुझे माफ़ कर दीजिए। मुझसे गलती हो गई। मैने जानबूझ कर ऐसा नहीं किया ,मैं उछलते हुए यहां कैसे आया मुझे नहीं मालूम, मैं कुछ समझ पाता आप जाग गए सिंहराज,आगे चिंटू ने बड़े प्रेम और हाथजोड़ कर कहां ,अगर आज आप मेरी जान बख्श देंगे , तो किसी दिन मैं भी आपकी मदद कर सकता हु।
शेर ज़ोर से हंस पड़ा। उसे लगा कि इतना छोटा चूहा उसकी क्या मदद करेगा? चिन्टु ने फिर से कहा ,आप तो जंगल के महाराज है ,आपका पेट तो बड़ा है ,मुझे खाकर क्या मिलेगा । सिंहराज ने सोचा जाने देता वैसे इससे मेरा क्या होगा ,फिर सिंगराज दया दिखाते हुए चिंटू छोड़ दिया।
जंगल में शिकारी
चिन्टु हाथ जोड़कर, धन्यवाद बोलकर चला गया,कुछ दिनों बाद जंगल में शिकारी आए। उन्होंने सिंहराज को पकड़ने के लिए मजबूत जाल बिछाया था , और शेर उस जाल में फंस गया और पूरी ताकत लगाने के बाद भी बाहर नहीं निकल पाया। वह जोर-जोर से दहाड़ने लगा। चीखने लगा ,फिर भी कोई नहीं आ रहा था, क्यों कि सबको डर था ,की अगर हमने इसे बचाया तो ये हमे खा जाएगा।
वही जब चिंटू ने शेर महाराज की आवाज़ सुनी और दौड़कर वहा पहुंचा। उसने देखा कि सिंहराज जाल में बुरी तरह फंस गया हैं। जब कोई उसकी मदद को आगे नहीं आया ,फिर भी चिंटू ने जान की परवाह किये ,बिना समय गंवाए उसने अपने तेज़ दांतों से जाल की रस्सी काटना शुरू कर दिया। रस्सी बहुत मजबूत थी,फिर भी चिंटू ने हार नहीं मानी जब तक रस्सी नहीं काटी। धीरे-धीरे रस्सी कट गईं और शेर आज़ाद हो गया।
सिंहराज शेर की आंखों में खुशी और शर्म दोनों थीं। उसने कहा, चिंटू आज मुझे समझ आ गया कि किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए। तुम्हारी छोटी-सी मदद ने मेरी जान बचा ली। चिंटू मुस्कुराया और बोला, “महाराज, दया और दोस्ती कभी व्यर्थ नहीं जाती।”
वो दिन के बाद सिंहराज शेर और चूहा चिंटू अच्छे मित्र बन गए। इन दोनों से जंगल के सभी जानवरों ने भी सीखा कि ताकत से बड़ी चीज़ दया, मित्रता और बुद्धि होती है, सभी जानवरों जैस भालू,लोमड़ी, खरगोश, बन्दर और भी जो साथ में रहते थे। इन्हें एहसास हो गया, अगर साथ मिलकर नहीं रहेंगे,तो कुछ भी हो सकता है, आज शेर की बारी थी कल हमारी हो सकती है वही शेर और चूहा ने कहां,इसीलिए दोस्ती बनाए रखे और साथ मे मिलजुलकर रहे ,नहीं तो जंगल बिखर जाएगा।अब सबने कसम खायी जब भी जंगल में किसी पर मुसीबत आयेगा।सब मिलकर उस मुसीबत का सामना करेंगे और लड़ेंगे।
कहानी की सीख (Moral)
इस सिंहराज और चिंटू(शेर और चूहा) की कहानी हमें सिखाती ,किसी को कभी छोटा या कमजोर मत समझो। समय आने पर छोटी-सी मदद भी सबसे बड़ी साबित हो सकती है।
आज के समय में भी यही बात लागू होती है,की हमे भी कभी कभी दूसरों की छोटी छोटी गलतियों को माफ कर देना चाहिए , और जीवन में हमेशा एक दूसरे की सहायता करना चाहिए। और शेर और चूहा जैसे ही रहना चाहिए।
ऐसी ही शेर और चूहा कहानियां देखने और पढ़ने के लिए Youtube channel @Storiesbygulabgautam और पेज www.Hindistories24.Com को भी सेव करके रखे
धन्यवाद,
जय हिंद



