मेहनत का फल एक प्रेरणादायक कहानी
मेहनत का फल एक प्रेरणादायक कहानी मेहनत का फल एक प्रेरणादायक कहानी एक बार को बात है ,एक छोटे से…
मेहनत का फल एक प्रेरणादायक कहानी

मेहनत का फल एक प्रेरणादायक कहानी एक बार को बात है ,एक छोटे से गांव में दो बच्चे रहते थे, आरव और कबीर
दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे, एक ही कक्षा में बैठते थे, लेकिन उनकी सोच एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थी। आरव को मेहनत पर भरोसा था, जबकि कबीर हमेशा जल्दबाजी में रहता था।
आरव रोज़ सुबह समय पर उठता, स्कूल के लिए तैयार होता और पूरी लगन से पढ़ाई करता। क्लास में वह टीचर की हर बात ध्यान से सुनता और जो समझ नहीं आता, उसे दोबारा पढ़ने या पूछने में कभी झिझकता नहीं था। उसे पता था कि मेहनत धीरे-धीरे सही, लेकिन मजबूत सफलता की तरफ ले जाती है।
वहीं कबीर पढ़ाई को बोझ समझता था। उसे लगता था कि इतनी मेहनत करना बेकार है। वह अकसर दोस्तों से होमवर्क लिखवा लेता और टेस्ट से पहले जल्दबाजी के भरोसे रहता था। कई बार नकल करके अच्छे नंबर आ भी जाते, जिससे उसे लगता कि मेहनत की कोई ज़रूरत ही नहीं है।
एक दिन कबीर ने आरव से मुस्कुराते हुए कहा, “तुम इतना पढ़ते क्यों हो? देखो, मैं बिना मेहनत के भी पास हो जाता हूँ।”
आरव मुस्कराया और बोला, “आज नहीं तो कल, मेहनत ही काम आएगी।”
कुछ समय बाद स्कूल में घोषणा हुई, कि साल की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा होने वाली है। इस परीक्षा के आधार पर बच्चों को अगली क्लास में खास सेक्शन मिलेगा। आरव ने उसी दिन से तैयारी शुरू कर दी। वह रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ता, लिखकर अभ्यास करता और अपनी गलतियों को हमेशा सुधारता रहा।
वहीं दूसरी तरफ कबीर ने सोचा कि अभी बहुत समय है और आख़िर में देख लेंगे। लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा नज़दीक आई, उसकी चिंता बढ़ने सी लगी। किताब खोलता तो उसे कुछ समझ ही नहीं आता। उसने जल्दबाजी की बहुत कोशिश की, लेकिन इस बार कोई रास्ता नहीं मिला।
परीक्षा वाले दिन आरव शांत था, उसे उसके ऊपर भरोसा था। उसने सवाल ध्यान से पढ़े और पूरे मन से उत्तर लिखे। वहीं दूसरी तरफ कबीर घबराया हुआ था। उसे पहली बार एहसास हुआ कि बिना मेहनत के वह आगे नहीं बढ़ सकता।
कुछ दिनों बाद परिणाम आया। आरव ने बहुत अच्छे अंक हासिल किए और उसे दूसरे सेक्शन में जगह मिल गई। कबीर पास तो हो गया, लेकिन उसके नंबर बहुत कम थे। उसकी आंखों में आंसू आ गए। मेहनत का फल मिला और मेहनत सही साबित हुई ।
कबीर आरव के पास गया और बोला, “आज मुझे समझ आ गया कि जल्दबाजी हमेशा काम नहीं आता। मैंने मेहनत से भागकर गलती की।”
आरव ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, दोस्त “गलती समझ लेना ही सबसे बड़ी सीख होती है।”
उस दिन के बाद कबीर ने मेहनत करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसकी पढ़ाई सुधरने लगी और उसका आत्मविश्वास भी बढ़ने लगा। उसे समझ आ गया कि मेहनत ही असली ताकत है, हमेशा खुश रखती है। फिर उसे भी अच्छे मार्क्स आने लगे और उसे भी मेहनत का फल मिला ।
इस मेहनत का फल कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मेहनत का कोई जल्दबाजी नहीं होता। जो मेहनत करता है, वही जीवन में सच्ची जीत हासिल करता है, मेहनत से ही जीवन बदल सकता है ये तो सच है।
ऐसे ही नहीं कहा जाता है कि , हमेशा मेहनत का फल मीठा और अच्छा होता है।
मेहनत के रास्ते जो चलना सीख जाता है,वही हर मुश्किल से आगे बढ़ जाता है।
जल्दबाजी दिखता है आसान हर बार,पर छोड़ जाता है सपनों को लाचार।
पसीने की बूंदें जब रंग लाती हैं,तब तकदीर भी सर झुकाती है।
मेहनत का दीप जो रोज़ जलाता है, वही जीवन में सच्ची जीत पाता है।
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धन्यवाद, जय हिंद
